साइबर स्टॉकिंग और ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग से जुड़े मामलों में पांच वर्षों में 300 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2022 में साइबर अपराध के 65,893 मामले दर्ज हुए थे, जबकि 2023 में यह संख्या और अधिक बढ़ी है। आज पढ़िए, मुरादाबाद से रवि कुमार का आलेख….
साइबर स्टॉकिंग और ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग से जुड़े मामलों में पांच वर्षों में 300 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2022 में साइबर अपराध के 65,893 मामले दर्ज हुए थे, जबकि 2023 में यह संख्या और अधिक बढ़ी है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो-एनसीआरबी के अनुसार भारत में साइबर अपराधों के आंकड़ें भयावह हैं। विशेषज्ञों का मानना है, वास्तविक मामले दर्ज केसों से कई गुना अधिक हैं, क्योंकि पीड़ित सामाजिक लाज और परिवार के डर से शिकायत नहीं करते। राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक ऐसे राज्य हैं जहाँ सेक्सटॉर्शन के सर्वाधिक मामले सामने आए हैं। हरियाणा के मेवात, राजस्थान के अलवर और भरतपुर क्षेत्र तो सेक्सटॉर्शन गैंग के गढ़ के रूप में बदनाम हो चुके हैं। उदाहरण के लिए रात के दस बजे थे, जब 22 वर्षीय अर्जुन के मोबाइल पर एक अनजान नंबर से कॉल आई। दूसरी तरफ से एक महिला की आवाज़ थी मीठी, आकर्षक। धीरे-धीरे बातों का सिलसिला वीडियो कॉल तक पहुंचा और फिर शुरू हुआ दुःस्वप्न। इस नाइटमेयर ने अर्जुन की महीनों की रातों की नींद छीन ली। यह कहानी केवल अर्जुन की नहीं है, यह लाखों भारतीयों की कहानी है, जो हर साल सेक्सटॉर्शन के जाल में फंसते हैं। सेक्सटॉर्शन-सेक्स और एक्सटॉर्शन का मिश्रण एक ऐसा साइबर अपराध है, जिसमें अपराधी पीड़ित की अंतरंग या आपत्तिजनक तस्वीरें, वीडियो या स्क्रीनशॉट प्राप्त करके उन्हें सोशल मीडिया पर प्रसारित करने या परिवार-मित्रों को भेजने की धमकी देते हैं और बदले में पैसे या और अधिक आपत्तिजनक सामग्री की मांग करते हैं। यह एक योजनाबद्ध, भावनात्मक और आर्थिक शोषण का तरीका है, जो पीड़ित को मानसिक रूप से पूरी तरह तोड़ देता है। मनोचिकित्सकों के मुताबिक सेक्सटॉर्शन के पीड़ितों पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव अत्यंत गंभीर होते हैं। पीड़ित गंभीर अवसाद-डिप्रेशन और चिंता का शिकार हो जाते हैं। सामाजिक अलगाव और शर्म की भावना उन्हें किसी से बात करने से रोकती है। पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर- पीटीएसडी के लक्षण सामने आते हैं। पढ़ाई, काम और व्यक्तिगत संबंधों पर बुरा असर पड़ता है। दुखद रूप से, कुछ मामलों में पीड़ित आत्महत्या तक का कदम उठा लेते हैं। वर्ष 2023 में केरल और महाराष्ट्र में ऐसे कई मामले सामने आए, जहां युवाओं ने सेक्सटॉर्शन के कारण जीवन समाप्त कर लिया। यही कारण है कि इस अपराध को डिजिटल हत्या भी कहा जाने लगा है।

यह खौफनाक या कहें तो डिजिटल युग के सेक्सटॉर्शन की कहानी है। दिल्ली के एक निजी कॉलेज में पढ़ने वाले 22 वर्षीय अर्जुन ने इंस्टाग्राम पर प्रिया नाम की एक युवती से बात शुरू की। महीने भर की दोस्ती के बाद प्रिया ने वीडियो कॉल करने का आग्रह किया। कॉल के दौरान स्क्रीन पर आपत्तिजनक दृश्य आए और अर्जुन की स्क्रीन रिकॉर्ड कर ली गई। अगले ही दिन 50,000 रुपये की मांग आई। डरे हुए अर्जुन ने पहले 20,000 भेजे, पर मांग और बढ़ती गई। तीन महीने की मानसिक यातना के बाद अर्जुन के माता-पिता को पता चला और उन्होंने साइबर सेल में शिकायत की। पुलिस ने राजस्थान के एक गांव से गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार कियज्ञं भारतीय कानून में सेक्सटॉर्शन के विरुद्ध कड़े प्रावधान मौजूद हैं। फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सअप जो प्लेटफॉर्म दोस्ती और संपर्क के लिए बने हैं- आज सेक्सटॉर्शन के प्रमुख माध्यम बन चुके हैं। अपराधी फर्जी प्रोफाइल बनाकर लड़कियों या आकर्षक युवतियों की फोटो लगाते हैं। फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सअप पर दोस्ती का नाटक करते हैं। व्हाट्सअप पर नंबर लेकर वीडियो कॉल के जाल में फंसाते हैं। स्नैपचौट और टेलीग्राम पर प्राइवेट चौट का भरोसा दिलाकर सामग्री प्राप्त करते हैं। एक बार अंतरंग तस्वीर या वीडियो मिल जाने के बाद ये अपराधी पूरी तरह बेनकाब हो जाते हैं और ब्लैकमेलिंग शुरू कर देते हैं। इन अपराधियों की कार्यप्रणाली बेहद चालाक और सुनियोजित होती है। पहला चरण फर्जी प्रोफाइल बनाना होता है। किसी आकर्षक युवती या युवक की फोटो चुराकर एक विश्वसनीय प्रोफाइल तैयार की जाती है। दूसरे चरण में दोस्ती का नाटक शुरू होता है। हफ्तों तक सामान्य बातचीत कर विश्वास बनाया जाता है। तीसरे चरण में वीडियो कॉल ट्रैप बिछाया जाता है। वीडियो कॉल के दौरान महिला सदस्य या डीपफेक तकनीक का उपयोग करके पीड़ित को आपत्तिजनक स्थिति में फंसाया जाता है और स्क्रीन रिकॉर्डिंग कर ली जाती है। चौथे और अंतिम चरण में ब्लैकमेल पैटर्न शुरू होता है। तुरंत पैसे की माँग की जाती है और धमकी दी जाती है कि यह वीडियो परिवार और मित्रों को भेज दिया जाएगा। एक बार पैसे देने के बाद डिमांड बढ़ती ही जाती है।
यदि आप या आपका कोई परिचित सेक्सटॉर्शन का शिकार हो तो घबराएं नहीं- मदद उपलब्ध है। सबसे पहले किसी विश्वसनीय व्यक्ति को बताएं और एकदम अकेले न रहें। राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत कॉल करें। यह 24×7 उपलब्ध है। डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट साइबरक्राइम डॉट जीओवी डॉट इन पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें। सभी धमकी भरे संदेशों, कॉल रिकॉर्ड और स्क्रीनशॉट का साक्ष्य सुरक्षित रखें। अपराधी को पैसे न दें- एक बार देने के बाद मांग बंद नहीं होती। संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक सामग्री को रिपोर्ट और रिमूव करने का अनुरोध करें। नजदीकी पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराएं- पुलिस को कानूनी रूप से आपकी मदद करनी होगी। सेक्सटॉर्शन से बचाव के लिए डिजिटल जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है। साइबर विशेषज्ञों का कहना है सेक्सटॉर्शन में पीड़ित की कोई गलती नहीं होती। सारा कुसूर अपराधी का होता है। पीड़ितों को शर्म छोड़कर तुरंत शिकायत करनी चाहिए। जो जितनी देर करता है, अपराधी उतना ही निर्भीक होता जाता है। साइबर टीम हर शिकायत को गंभीरता से लेती है और पीड़ित की पहचान गोपनीय रखती है। मनोचिकित्सकों के अनुसार इस अपराध के शिकार लोग यह न समझें कि उनकी ज़िंदगी खत्म हो गई। परामर्श और कानूनी मदद से हजारों पीड़ित इस भंवर से बाहर निकले हैं। परिवार और समाज को पीड़ित को दोष देने की बजाए उनका साथ देना चाहिए। डिजिटल क्रांति ने हमें असीमित सुविधाएं दी हैं, पर इसके साथ जिम्मेदारी भी आई है। सेक्सटॉर्शन केवल कानून और पुलिस से नहीं रुकेगा। इसके लिए सामाजिक जागरूकता, पारिवारिक संवाद और डिजिटल साक्षरता। हर शिकायत एक और जाल तोड़ती है। याद रखें आप अकेले नहीं हैं। मदद मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि सबसे बड़ी ताकत है।
महत्वपूर्ण संपर्क नंबरः साइबर क्राइम हेल्पलाइन- 1930। पोर्टल डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट साइबरक्राइम डॉट जीओवी डॉट इन
(लेखक तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी में फॉरेंसिक साइंस विभाग के एचओडी हैं। आर्टिकल में दिए गए सभी नाम काल्पनिक हैं )













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