चरित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर महाराज की पट्टपरंपरा के तृतीय पट्टाचार्य आचार्य श्री धर्मसागर महाराज से दीक्षित वयोवृद्ध श्रेष्ठ और महान आचार्य श्री विपुल सागर महाराज का अतिशय क्षेत्र अयोध्या में आज एक जून को दोपहर 11 बजकर पांच मिनट पर निर्यापकाचार्य श्री भद्रबाहु सागरजी महाराज के कुशल नेतृत्व में और गणिनी आर्यिका105 ज्ञानमती माताजी के सानिध्य में सल्लेखनापूर्वक समाधि मरण हुआ। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट…
इंदौर। चरित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर महाराज की पट्टपरंपरा के तृतीय पट्टाचार्य आचार्य श्री धर्मसागर महाराज से दीक्षित वयोवृद्ध श्रेष्ठ और महान आचार्य श्री विपुल सागर महाराज का अतिशय क्षेत्र अयोध्या में आज एक जून को दोपहर 11 बजकर पांच मिनट पर निर्यापकाचार्य श्री भद्रबाहु सागरजी महाराज के कुशल नेतृत्व में और गणिनी आर्यिका105 ज्ञानमती माताजी के सानिध्य में सल्लेखनापूर्वक समाधि मरण हुआ। आचार्य श्री का 48 वां मुनि दीक्षा दिवस चल रहा था। आचार्य श्री विपुल सागर महाराज ने अपना आचार्य पद आचार्य श्री भद्रबाहु सागर को प्रदान कर दिया था। आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज को आचार्य पद प्रदान कर दिया था।आचार्य श्री 89 साल के थे। आज शाम 4:30 बजे अंत्येष्टि का कार्यक्रम होगा।
आचार्य श्री का जन्म परिचय
उनका जन्म नाम श्री वीर चंद्र पाटनी था। टोंक(राजस्थान) के पलाई ग्राम में 16 अप्रैल 1934 को शुक्ल 13 संवत 1992 महावीर जयंती पर उनका जन्म हुआ। उनकी माता का नाम कस्तूरी बाई पाटनी और पिता का नाम बजरंग लाल पाटनी था। भाई मोहनलाल पाटनी मुनि महेन्द्र सागर हैं। बहिन का नाम लाड बाई पाटनी है। उन्होंने ब्रह्मचर्य व्रत अप्रेल 1960 में लिया। उनकी मुनि दीक्षा 1976 में मुजफ्फरनगर (उत्तरप्रदेश) में हुई। आचार्य पद एक मई 1996 को वैशाख शुक्ल त्रयोदशी को जावद (उदयपुर) में मिला।
चरित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर महाराज की परम्परा के तृतीय पट्टाचार्य आचार्य श्री धर्मसागर महाराज द्वारा दीक्षित आचार्य श्री विपुलसागर महाराज का समाधि मरण आज अयोध्या में मध्यान्ह 11 बजे सावधानी पूर्वक महामंत्र श्रवण करते हुए हो गया है।
– श्री दिगम्बर जैन अयोध्या तीर्थ क्षेत्र कमेटी, अयोध्या













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