जैनाचार्य वैज्ञानिक संत आचार्यश्री निर्भयसागर जी महाराज ने भगवान महावीर स्वामी जन्म कल्याणक महोत्सव के अवसर पर बड़े जैन मंदिर में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान महावीर केवल जैनों के ही नहीं, बल्कि जन-जन के आराध्य हैं। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर ने सत्य और अहिंसा का संदेश संपूर्ण विश्व को दिया। पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट…
मुरैना। जैनाचार्य वैज्ञानिक संत आचार्यश्री निर्भयसागर जी महाराज ने भगवान महावीर स्वामी जन्म कल्याणक महोत्सव के अवसर पर बड़े जैन मंदिर में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान महावीर केवल जैनों के ही नहीं, बल्कि जन-जन के आराध्य हैं। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर ने सत्य और अहिंसा का संदेश संपूर्ण विश्व को दिया। जिसने उनके सिद्धांतों को स्वीकार किया, वही सच्चे अर्थों में जैन कहलाने का अधिकारी है। उन्होंने आगे कहा कि जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ स्वामी के जन्म कल्याणक से लेकर अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक तक लगातार 20 दिनों तक धार्मिक आयोजन किए जाने चाहिए, क्योंकि यह अवधि आत्मचिंतन, साधना और धर्म के गहन अध्ययन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। इस दौरान यदि श्रद्धालु नियमित रूप से धर्मकार्य, स्वाध्याय और साधना में संलग्न रहें, तो उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन संभव है। धार्मिक आयोजन समाज में धार्मिक जागरूकता को बढ़ाते हैं और लोगों को आत्मकल्याण के मार्ग पर अग्रसर करते हैं।
जैन मित्र मंडल ने की रथयात्रा की भव्य अगवानी
मानव सेवा हेतु समर्पित समाजसेवी संस्था जैन मित्र मंडल के एक सैकड़ा से अधिक कार्यकर्ताओं ने भगवान महावीर स्वामी जन्म कल्याणक महोत्सव पर आयोजित भव्य एवं विशाल श्रीजी शोभायात्रा की भव्य अगवानी की। जैन मित्र मंडल, मुरैना के सभी सदस्य पारंपरिक वेशभूषा में—सिर पर गुलाबी एवं केसरिया पगड़ी तथा श्वेत वस्त्र धारण कर जैनाचार्य निर्भयसागर जी महाराज ससंघ के साथ गगनभेदी जयघोष करते हुए चल रहे थे। एक समान परिधान में सुसज्जित सदस्य सभी के आकर्षण का केंद्र बने हुए थे। गोपीनाथ की पुलिया पर सभी सदस्यों ने सामूहिक रूप से आचार्यश्री का पाद-प्रक्षालन किया तथा भगवान महावीर स्वामी की आरती कर भव्य स्वागत किया।
रथयात्रा के समापन पर हुए कलशाभिषेक
भगवान महावीर स्वामी के 2625वें जन्म कल्याणक महोत्सव के अवसर पर भव्य एवं विशाल रथयात्रा निकाली गई। पीत वस्त्रों में सुसज्जित इंद्रों ने भगवान महावीर स्वामी को रथ में विराजमान कर बड़े जैन मंदिर से यात्रा प्रारंभ की। यह यात्रा गोपीनाथ की पुलिया, जीवाजी गंज, सूबात रोड, पुल तिराहा, हनुमान चौराहा, स्टेशन रोड, शंकर बाजार, सदर बाजार, सराफा बाजार और लोहिया बाजार से होती हुई पुनः बड़े जैन मंदिर पहुंची, जहां यह धर्मसभा में परिवर्तित हो गई। जैन मंदिर में भगवान की प्रतिमा को पांडुक शिला पर विराजमान कर विधिवत कलशाभिषेक किया गया। प्रासुक शुद्ध जल से भरे कलशों की जलधारा जैसे ही भगवान के मस्तक पर प्रवाहित हुई, पूरा मंडप तालियों, घंटा-घड़ियाल और महावीर स्वामी के जयकारों से गूंज उठा। सभी उपस्थित साधर्मी बंधुओं ने इस पावन अवसर पर सहभागिता कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
नंगे पैर चलकर, हाथों से खींचा भगवान का रथ
भव्य रथयात्रा में जैनाचार्य निर्भयसागर जी महाराज, मुनिश्री सुदत्तसागर महाराज, मुनिश्री भूदत्तसागर महाराज, क्षुल्लकश्री चंद्रदत्तसागर महाराज तथा क्षुल्लकश्री यशोदत्तसागर महाराज के सान्निध्य में सैकड़ों साधर्मी बंधु, माताएं, बहनें और युवा साथी शामिल हुए। सभी श्रद्धालु भगवान महावीर स्वामी का गुणगान करते हुए नंगे पैर चल रहे थे। युवा साथियों ने अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान के रथ को अपने हाथों से खींचकर अपनी जिनेंद्र भक्ति का परिचय दिया। भव्य शोभायात्रा में घोड़ों पर सवार युवाओं के हाथों में पचरंगा ध्वज, घोड़ा-बग्गी में विराजमान इंद्र-इंद्राणी एवं आकर्षक झांकियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। सभी साधर्मी बंधु सिर पर सफेद टोपी और गले में सुनहरी चुनरी धारण किए हुए थे। नगर भ्रमण के दौरान विभिन्न स्थानों पर भगवान महावीर स्वामी एवं पूज्य आचार्य संघ की आरती कर भव्य अगवानी की गई।













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