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मोक्ष कल्याणक के साथ पंच कल्याणक महोत्सव संपन्न: आत्मा से परमात्मा बनने लिए मोहरूपी शत्रु का दमन जरूरी – मुनि श्री आदित्य सागर महाराज 


हमें सभी छोटों और बड़ों के प्रति मन में सम्मान तथा विनय भाव धारण करना चाहिए, क्योंकि विनय ही मोक्ष का द्वार है। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट…


इंदौर। जिसका मोक्ष हो जाता है, उसका मनुष्य भव में जन्म लेना सार्थक हो जाता है। जब तक संसार है तब तक चिंता रहती है, हमें अपनी आत्मा को परमात्मा बनाने के लिए मोहरूपी शत्रु का नाश करना पड़ता है, तब मोक्ष प्राप्त होता है। अत: हमें सभी छोटों और बड़ों के प्रति मन में सम्मान तथा विनय भाव धारण करना चाहिए, क्योंकि विनय ही मोक्ष का द्वार है। नीतिकार कहते हैं श्रेष्ठ कार्य में विघ्न आते ही नहीं अगर आते हैं तो वह श्रेष्ठ कार्य नहीं। हमारा जन्म तभी सार्थक है जब कृति की कीमत उसके कृतित्वार्थ से होती है। यह बात श्रुत संवेगी मुनि श्री आदित्य सागर महाराज ने आज अंबिकापुरी में पंच कल्याणक महोत्सव के अंतिम दिन मोक्ष कल्याणक पर उपस्थित सैकड़ों जैन धर्म अनुयाईयों को सम्बोधित करते कही।

मुनिश्री का जन्मदिवस मनाया 

प्रचार प्रमुख राजेश जैन दद्दू और डॉ. अभिषेक सेठी ने बताया कि मुनिश्री आदित्यसागर महाराज का आज की 37 वां जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इंदौर, बडौदा, बेंगलोर, जबलपुर, भोपाल, अहमदाबाद, भीलवाडा, धार आदि अनेक स्थानों के मुनिभक्त परिवारों ने पूज्य श्री को अष्ट द्रव्य समर्पित किए ।

विजेन्द्र सोगानी ने बताया कि इस मौके पर मुनिश्री द्वारा रचित सहीं बाते, ओम इग्नोराय नम: सहित छ: पुस्तकों का विमोचन किया गया। भोजन व्यवस्था प्रमुख चित्रेश टोंग्या, रूपेश कालाकुण्ड, दिवेश जैन के कुशल नेतृत्व में जन्म जयंती के अवसर पर लगभग 4000 साधर्मियों ने वात्सल्य भोज का लाभ लिया।

भजन संध्या सहित अनेक कार्यक्रम हुए 

टोनी गंगवाल, आशीष जैन, संदीप्त सांवला ने बताया कि पूज्य मुनिश्री आदित्यसागरजी महाराज की जन्म जयंती की पूर्व संध्या पर विशेष दीप श्रृंगार आरती एवं ख्यात भजन भजन गायक लवेश भुरड की भजन संध्या का आयोजन किया गया। प्रतिष्ठाचार्य नितिनजी झांझरी, पंकज कालाकुण्ड ने बताया कि प्रात:कालीन सत्र में अभिषेक, शांतिधारा, नित्यमह पूजन, ज्ञान कल्याणक पूजन, कैलाश पर्वत से आदिनाथ भगवान का मोक्ष गमन, श्रीजी भव्य शोभायात्रा के साथ नूतन जिनालय की नूतन वेदिका पर कलशारोहण, विश्व शांति महायज्ञ, पुण्याहवाचन आदि संपादित हुए।

इंदौर व बाहर से आए श्रावकों ने दी विनयाजंलि

पंकज परमहंस एवं निकेश ने कहा कि दोपहर के सत्र में श्रुत संवेगी श्रमण श्री आदित्यसागरजी मुनिराज के 37 वें अवतरण दिवस पर इंदौर एवं बाहर से पधारे हुए श्रावकों द्वारा जिनभारती पूजन, आचार्यश्री पूजन, गुरूपूजन, विनयांजलि देने में दिगंबर जैन समाज समाजिक सांसद के मंत्री डॉ जैनेन्द्र जैन, अर्पित वाणी, राजेश कानूनगो परवार समाज महिला मंडल की अध्यक्ष मुक्ता जैन, सारिका जैन शामिल हुए। इस दौरान प्रवचन एवं सम्मान समारोह मांगलिक कार्यक्रम संपन्न हुए ।

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