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मोहनखेड़ा तीर्थ पर दिखा धर्म समन्वय का अद्भुत दृश्य : आचार्य श्री 108 सुनीलसागर जी ससंघ का श्वेतांबर समाज ने किया भव्य स्वागत


मोहनखेड़ा श्वेतांबर तीर्थ पर आचार्य श्री 108 सुनीलसागर जी महाराज ससंघ का श्रद्धा एवं उत्साह के साथ भव्य स्वागत किया गया। इस अवसर पर दिगंबर एवं श्वेतांबर परंपराओं के संतों का आत्मीय मिलन धर्म समन्वय और पारस्परिक सम्मान का प्रेरक उदाहरण बना। पढ़िए श्रीफल साथी अजीत कोठिया की यह रिपोर्ट।


मोहनखेड़ा। मोहनखेड़ा श्वेतांबर तीर्थ क्षेत्र में आचार्य श्री 108 सुनीलसागर जी महाराज ससंघ का मंगल प्रवेश श्रद्धा, भक्ति और उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। श्वेतांबर समाज ने बैंड-बाजों के साथ गुरुदेव का भव्य स्वागत किया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री के श्रीचरणों में वंदन कर धर्मलाभ प्राप्त किया।

धर्म समन्वय का बना प्रेरक उदाहरण

देशभर में पूज्य आचार्य श्री राजेंद्रसूरिश्वर जी महाराज की तपोस्थली के रूप में विख्यात मोहनखेड़ा तीर्थ पर दिगंबर एवं श्वेतांबर परंपराओं का यह आत्मीय मिलन धर्म समन्वय और पारस्परिक सम्मान का अद्भुत दृश्य बन गया। इस अवसर पर श्वेतांबर परंपरा के पूज्य साधु हितेशचंद्रसूरिश्वर जी महाराज ने भी आचार्य श्री की अगवानी की। दोनों संतों के मध्य धार्मिक एवं आध्यात्मिक विषयों पर सारगर्भित चर्चा हुई। इसके पश्चात श्वेतांबर संघ ने आचार्य श्री ससंघ को संपूर्ण तीर्थ क्षेत्र का दर्शन कराया।

धर्म से आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है

धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री सुनीलसागर जी महाराज ने कहा कि मनुष्य को सदैव धर्मकार्य में तत्पर रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि जहां से और जिस माध्यम से धर्म का लाभ मिले, उसे विनम्रतापूर्वक ग्रहण करना चाहिए। धर्म किसी संकीर्णता का नहीं, बल्कि आत्मकल्याण, सद्भाव, संयम, सेवा और सदाचार का मार्ग है। उन्होंने कहा कि जीवन की वास्तविक उन्नति धन-संपत्ति से नहीं, बल्कि उत्तम संस्कारों, सद्विचारों और धर्ममय आचरण से होती है।

दिगंबर साधु जीवन की कठोर साधना से हुए परिचित

आहारचर्या के दौरान श्वेतांबर साधुगणों ने दिगंबर मुनियों की कठोर एवं विलक्षण आहारचर्या का अवलोकन किया। उन्हें बताया गया कि दिगंबर साधु 24 घंटे में केवल एक बार खड़े होकर आहार एवं जल ग्रहण करते हैं तथा आजीवन किसी भी प्रकार के वाहन का उपयोग किए बिना हजारों किलोमीटर तक पदविहार करते हैं। दिगंबर साधु जीवन की तप, त्याग और संयममयी परंपरा से उपस्थित श्रद्धालु भी प्रेरित हुए।

श्रद्धालुओं ने किया श्रीफल भेंट

इस अवसर पर धार से आए श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री के श्रीचरणों में मांतुंगगिरि पधारने का विनम्र आग्रह करते हुए श्रीफल भेंट किया। वहीं इंदौर की विभिन्न कॉलोनियों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन एवं वंदन के लिए मोहनखेड़ा पहुंचे। अनेक श्रद्धालुओं ने संघ के मंगल विहार में सेवा समर्पित कर धर्मलाभ अर्जित किया।

इंदौर चातुर्मास के लिए मंगल विहार जारी

आहारचर्या के उपरांत आचार्य श्री सुनीलसागर जी महाराज ससंघ का इंदौर की ओर मंगल विहार प्रारंभ हुआ। भीषण गर्मी के बावजूद गुरुदेव का संघ निरंतर पदविहार करते हुए चातुर्मास स्थली इंदौर की ओर अग्रसर है। तप, त्याग और संयममय जीवन के माध्यम से गुरुदेव असंख्य श्रद्धालुओं को धर्म एवं आत्मकल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्रदान कर रहे हैं।

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