समाचार

हमारे आचार-विचार खानपान सब एक हों : मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी ने जीवन चर्या के बताए सूत्र 


हमारे आचार-विचार एक हैं। खानपान एक होना चाहिए। हमारी संस्कृति सभ्यता को हम आगे बढ़ाएं। हर चीज की सीमा करो यहां तक की खाने पीने की भी सीमा कर सकते हैं।यह उद्गार सुधा सागर सभागार में धर्मसभा में मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी ने व्यक्त किए। मुंगावली से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर…


मुंगावली। हमारे आचार-विचार एक हैं। खानपान एक होना चाहिए। हमारी संस्कृति सभ्यता को हम आगे बढ़ाएं। हर चीज की सीमा करो यहां तक की खाने पीने की भी सीमा कर सकते हैं। यह उद्गार सुधा सागर सभागार में धर्मसभा में मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि मनुष्य कहीं भी कुछ भी खा सकता है लेकिन, उसकी भी मर्यादा होना चाहिए। मैं बाजार में नहीं खाऊंगा, मैं घर में भी सिर्फ किचन में भोजन करूंगा। घर में भी कुछ स्थानों को वर्जित करो। मैं कभी झूठे मुंह मंदिर नहीं जाऊंगा। घर में हम अपने किचन में जूते-चप्पल का उपयोग नहीं करेंगे। घर में मनुष्य को श्रृंगार करने की छूट मिली है। उसमें भी आप चाहें तो कुछ चीजें को छोड़ सकते हैं। मुनिश्री ने कहा कि ये मन्दिर जाने के ऐसे नियम है, जिससे अभिषेक शांतिधारा का आपको उत्कृष्ट फल मिल सके। कोई क्रीम पाउडर लगाकर नहीं आयेंगे। आज आप दुनिया में कहीं भी रिश्तेदारी कर सकते हैं। आपको इसमें भी सही रिश्तेदारी करना है। मुनिश्री ने बताया कि हमने कहा था चक्रवर्ती विवाह कोई नई चीज नहीं है। ये हमारी संस्कृति का हिस्सा है। इसे पुनर्जीवित किया है, हम उसी से शादी करेंगे जिनका आचरण विचार एक होगा। हमारे गुरु और उनके गुरु एक हों। आज संसारिक कार्य करने में हम सभी सीमाएं लांघ रहे हैं।

साधारण काम करते हुए भी जिंदगी को असाधारण बना सकते हैं

मुनिश्री ने कहा कि साधारण काम करते हुए भी जिंदगी को असाधारण बनाओ। कार्य तो सभी करते हैं लेकिन, कुछ काम ऐसे होते हैं जो आप लोगों के बीच भी जिंदगी भर याद किये जाते हैं। मुंगावली में भी कुछ ऐसा ही होने जा रहा है। आने वाले समय में भावी पीढ़ी जब नमोदय तीर्थ को देखेगी तो आपको याद कर अपने भाग्य को सराहेगी। मनुष्य ही ऐसा कुछ कर सकता है जो अन्य लोग नहीं कर सकते। कुछ ऐसा करो जो जगत में ध्रुव तारे की तरह चमको। प्रकृति तुम्हारे लिए हमेशा मौका देती है। कर्म सभी को मौका देता है। तीर्थंकर भगवान के कुल में पैदा किया फिर भी संयम नहीं लिया। प्रकृति ने ऐसी व्यवस्था बनाई है, असंयम की छूट मात्र मनुष्य को मिली है। पशुओं की योनि में कुछ पशु रात में नहीं खा सकते। कुछ जानवर दिन में नहीं खा सकते

जीवन को अच्छी दिशा में ले जाने का पुरुषार्थ करना

मुनिश्री ने आगे कहा कि मात्र मनुष्य को सब कुछ करने की छूट मिली है। जहां चाहे पाप करने की छूट है। पाप करने की संसार की कोई सीमा नहीं है। चौरासी लाख योनियों में सिर्फ मनुष्यों को ये छूट मिली। इसकी सीमा निर्धारित करो। इनसे बचने का सबसे सरल उपाय है। अपने आप को अभिषेक शांतिधारा से जोड़कर अपने जीवन को अच्छी दिशा में ले जाने का पुरुषार्थ करना है वरना ये संसार सागर तो अनादिकाल से चल रहा है और चलता रहेगा। इसको कोई रोक नहीं सकता। अपने आप को रोककर सुधारने की आवश्यकता है। हम सुधरेंगे तो जग सुधरेगा। जगत को सुधारने की चिंता छोड़कर अपने आप को सुधारने की आवश्यकता है तब ही कल्याण होगा। एक दिन आप सब का भी कल्याण हो ऐसी भावना है।

जिले में होगा एक बड़ा कार्य, जहां होगी मंदिर की प्रतिष्ठा

मध्यप्रदेश सभा संयोजक एवं अशोक नगर जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने बताया कि मुनि पुंगवश्री सुधासागरजी ससंघ के सान्निध्य एवं प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया के निर्देशन में जिला मुख्यालय से करीब 36 किमी दूर बंगला चौराहे पर नवनिर्मित जिनालय की प्रतिष्ठा होगी। इस के लिए गुरुदेव से बंगला चौराहे जैन समाज के साथ ही अशोक नगर समाज के भक्तों ने प्रतिमा स्थापित कर्ता मनोज कुमार ओड़ेर, बाबूलाल जैन, मनोज सरपंच, मोनू ओड़ेर, संजीव जैन, रिक्कू सौरव जैन सहित अन्य प्रमुखजनों ने श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया एवं बंगला चौराहे में नव निर्मित भव्य जिनालय के लिए श्रीफल भेंट किए। इस दौरान खनियांधाना के तहसीलदार ऋषिकांत जैन का दर्शनोदय कमेटी के साथ मुंगावली जैन समाज अध्यक्ष रूपेश जैन, शशांक सिंघई, काली मोदी, अशोक सर्राफ, देवेंद्र सिंघई, राजीव भगत, संजय सिंघई आदि ने सम्मान किया।

आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
0
+1
0
+1
0
Shree Phal News

About the author

Shree Phal News

Add Comment

Click here to post a comment

You cannot copy content of this page