हमारे आचार-विचार एक हैं। खानपान एक होना चाहिए। हमारी संस्कृति सभ्यता को हम आगे बढ़ाएं। हर चीज की सीमा करो यहां तक की खाने पीने की भी सीमा कर सकते हैं।यह उद्गार...
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गृहस्थ जीवन में रहते हुए व्यक्ति जीवन यापन के संसाधनों को जुटाने में इतना व्यस्त हो जाता है कि सब कुछ भूल जाता है। उसे अपने स्वरूप का, जगत का ज्ञान ही नहीं...
श्री भगवान मुनिसुब्रतनाथ के लिए पथरिया में विराजित आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी से मुनिसुब्रतनाथ दिगंबर जिनालय की नवनिर्माण प्रबंध कार्यकारिणी के पांच सदस्यीय...








