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धूमधाम से शुरू हुआ महामहोत्सव : गाजे बाजे के साथ निकला जुलुस 


महाराष्ट्र में धूमधाम के साथ महामहोत्सव मनाया जा रहा है। महोत्सव में दिव्य मंत्रों के साथ उत्कृष्ट सिंहनिष्कीडित व्रतकर्ता-साधना महोदधि अन्तर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज के सान्निध्य में आयोजन हो रहे हैं। गाजे बाजे के साथ निकले जुलुस की चमक से पूरे उदगांव को झंकृत कर दिया। यह महोत्सव उदगांव की इस पावन धरा पर नया इतिहास बना रहा है। जिसके साक्षी यहां मौजूद हजारों भक्त के साथ इस धरती का कण-कण बन रहा है। पढ़िए राज कुमार अजमेरा और मनीष सेठी की रिपोर्ट । 


कोडरमा । श्री ब्रहम्नाथ पुरातन दिगंबर जैन मंदिर टस्ट कुंजवन उदगांव में आदि-सन्मति तीर्थ धाम में कुंजवन महोत्सव मनाया जा रहा है । 22 दिसंबर को भगवान मेला, आनंद महोत्सव का आयोजन किया गया। इसमें सुबह 7 बजे आचार्य श्री को निमंत्रण, गुरूवर्य की आज्ञा उपलब्ध होने पर मंदिर जी से श्रीजी की मूर्ति को रथ में विराजमान करने के साथ ही जुलूस के रूप में भ्रमण कराया गया। । जुलुस में 108 सौभाग्यवती महिलाएं एवं 56 कुमारिकांए की मंगलकुंभ घटयात्रा अपने पवित्र पावन परिधानों के साथ अनोखी आभा से जनमानस को पावनता के अहसास से सराबोर करती रही। जुलूस के कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने से पूर्व मंत्रोच्चारण के साथ ही धार्मिक कियाओं के द्वारा मंडप का उद्घाटनवेदी शुद्धि कर मंडप में भगवान को विराजमान किया गया। यहां अलोकिक दिव्य मंत्रों के साथ अन्तर्मना के सान्निध्य में श्रीजी का अभिषेक किया गया।प्रभु अभिषेक करने वाले और देखने वाले भक्तों की कर्म निर्जरा स्वतः ही शुरू हो जाती है, अभिषेक को भव्यता भक्तों के भावों में होती है। जैसे भाव वैसा ही प्रताप उनके जीवन में उदय होता है। प्रभु अभिषेक के साथ ही शांतिधारा और पूजा होती रही। अन्तर्मना के सान्निध्य में पवित्रमंत्रों के उच्चारण के साथ घ्वजारोहण किया गया।

मन की शुद्धि का मार्ग है धर्म 

इस मौके उत्कृष्ट सिंहनिष्कीडित व्रतकर्ता- साधना महोदधि अन्तर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महामुनिराज ने अपने मंगल उदबोधन में, भक्तों को भक्ति का अर्थ और इस मौके पर आयोजित कार्यक्रमों के प्रति भावों की निर्मलता के लाभ बताने के साथ ही मानव जीवन की अलोकिकता से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि जीवन की आपाधापी के बीच मानव मन विभिन्न प्रकार के विकारों से ग्रस्त हो जाता है, उसकी प्रतिदिन शुद्धि भी आवश्यक है। मानव मन की शुद्धि का एक ही मार्ग है वह है धरम की शरण, जब हम धर्म की शरण लेते है। तब ही हमारे विचार और भावों में परिवर्तन होते हैं। यही परिवर्तन जीवन की उत्कृष्टता की ओर हमारा पथ प्रशस्त करते हैं । अन्तर्मना के प्रवचन के उपरांत आहार चर्या का पड़गाहन कर भक्तों ने आहार कराया।

सांस्कृतिक कार्यकमों की धूम रही

दोपहर में आचार्य श्री सन्मति सागर जी की मूर्ति का आकार शुद्धि एवं लोकार्पण किया गया। इस मौके पर आचार्य सन्मति सागर जी के स्मरणों का उल्लेख करते हुये उनकी कठिन तपश्चर्या एवं अतिशय के बारे में बताया गया। ऐसे आचार्य धरा पर विरले ही हुये हैं, जिनसे आज भी जन-जन उपकृत हो रहा है। संध्या काल मे सिंहनिष्कीडित व्रतकर्ता-साधना महोदधि अन्तर्मना आचार्यश्री 108 गुरूवर्य प्रसन्न सागर जी महाराज के प्रवचन एवं आनंद यात्रा अन्तर्मना की आरती का आयोजन धूमधाम के साथ हुआ। इसके बाद सांस्कृतिक कार्यकमों की धूम रही। इसमें भक्तों ने तरह-तरह के अभिनय एवं भजनों पर नृत्य कर मौजूद लोगों का मन मोह लिया। 23 दिसंबर को मंत्र स्नान महोत्सव के कार्यक्रम हुए। 24 दिसंबर को तपस्वी सम्राट समाधि महोत्सव 25 को जन मंगल मत्रानुष्ठान महोत्सव, 26 दिसंबर को यागमंडल विधान, गुरु कृपा व्रत संस्कार महोत्सव हुआ । 27 दिसंबर को मंदिर शुद्धि गर्भकल्याणक महोत्सव, 28 दिसंबर को जन्मकल्याणक 29 दिसंबर दीक्षा कल्याणक के कार्यक्रमों का आयोजन होंगे। यह सभी कार्यकम उत्कृष्ट सिंहनिष्कीडित व्रतकर्ता-साधना महोदधि अन्तर्मना आचार्यश्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज के सानिध्य ओर उपाध्याय सौम्य मूर्ति 108 पीयूष सागर जी महाराज के निर्देशन में हो रहा है।

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