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संयम धारण करने से ही जीवन का निर्माण होता है : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने जीवन निर्माण से लेकर निर्वाण के सूत्र बताए


आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 35 पिच्छी का निर्माण नगर पारस जिनालय से नेमिनाथ जिनालय नेमी सागर कॉलोनी में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर…


जयपुर। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 35 पिच्छी का निर्माण नगर पारस जिनालय से नेमिनाथ जिनालय नेमी सागर कॉलोनी में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। इस अवसर पर आयोजित धर्मसभा में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ, व्यसन और फैशन,संस्कार ,संस्कृति, संयम से जीवन का निर्माण से शाश्वत आध्यात्मिक सुख निर्वाण प्राप्त करने के महत्वपूर्ण सूत्र में प्रतिपादित किए। आचार्य श्री ने प्रवचन में बताया कि श्री नेमिनाथ कुमार को पशुओं की करुण पुकार सुनने से वैराग्य का निमित्त मिला और बगैर विवाह किए उन्होंने संयम धारण कर लिया। होने वाली पत्नी राजुल ने भी उसी मार्ग का अनुसरण कर संयम आर्यिका दीक्षा धारण की।

तीर्थंकरों का चरित्र महान चरित्र

आचार्य श्री ने उपदेश में बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ अभियान में उच्च शिक्षा से व्यसन और फैशन से बालिकाओं की संस्कार हीनता पर चिंता प्रकट की। उन्होंने कहा कि श्री नेमिनाथ भगवान सहित सभी तीर्थंकरों का चरित्र महान चरित्र है, वैराग्य पद है, सभी को तीर्थंकरों का चरित्र पढ़ना चाहिए। वैराग्य से जीवन का निर्माण होता है तभी शाश्वत निर्वाण सुख की प्राप्ति होती है। पांच बाल ब्रह्मचारी तीर्थंकरों में श्री पारसनाथ, श्री नेमिनाथ भगवान बाल ब्रह्मचारी तीर्थंकर हुए हैं।अनेक तीर्थंकरों ने विवाह कर संसार बसाकर भी संयम धारण किया। संयम धारण करने से ही जीवन का निर्माण होता है।

29 अप्रैल को जैनेश्वरी दीक्षा होगी

जैन धर्म आध्यात्मिक धर्म है। श्री नेमिनाथ भगवान का संघ सानिध्य में 26 वर्षों पूर्व पंचकल्याणक हुआ। तब दो भव्य प्राणियों ने दीक्षा ली। भगवान का पूजन करना तभी सार्थक होगा जब भगवान के चरित्र से महत्वपूर्ण अनंत गुणों को देखें। संयम धारण करने से आध्यात्मिक सुख प्राप्त होता है, जो भौतिक सुख की तुलना में बड़ा और महान होता है। 28 अप्रैल को अन्य कॉलोनी में आचार्य संघ का प्रवेश होगा। 29 अप्रैल को मंगलम सिटी में 2 जैनेश्वरी दीक्षा आचार्य श्री के सिद्धहस्त कर कमलों से होगी।

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