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जैन धर्म का न कहीं आदि है न ही अंत: पूरे देश में आदिनाथ स्वामी का जन्म कल्याणक धूमधाम से मनाएं


हम सभी जानते है कि आज से कई खरबों वर्ष पूर्व जैन धर्म 1008 श्री आदिनाथ स्वामी प्रथम तीर्थंकर द्वारा इस युग मे प्रवर्तित हुआ वैसे जैन धर्म अनादि निधन है। इसका ना तो कही आदि है ना ही अंत है। हमारा धर्म सर्वप्राचीन है। पढ़िए राजेश जैन द्द्दू की रिपोर्ट…


इंदौर। हम सभी जानते है कि आज से कई खरबों वर्ष पूर्व जैन धर्म 1008 श्री आदिनाथ स्वामी प्रथम तीर्थंकर द्वारा इस युग मे प्रवर्तित हुआ वैसे जैन धर्म अनादि निधन है। इसका ना तो कही आदि है ना ही अंत है। हमारा धर्म सर्वप्राचीन है मगर हमारी थोड़ी-सी कमी के कारण आज पूरा विश्व जैन धर्म को मात्र 2500 वर्ष पूर्व श्री 1008 महावीर स्वामी के समय से मानता है जिसका मूल कारण है हम सिर्फ श्री महावीर जन्म कल्याणक जयंती को ही विस्तृत रूप से मनाते है जबकि होना यह चाहिए था कि हमे युग निर्माता आदि ब्रह्म श्री आदिनाथ स्वामी का जन्म कल्याणक महोत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाने की परंपरा को जीवंत करना था

निकालें जुलूस

इस सम्बंध में पूज्य आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी, गुरु श्री सुधा सागर जी भी कई बार कह चुके हैं। 16 मार्च 2023 गुरुवार चैत्र बदी नवमी को देवो के देव महादेव त्रिलोकीनाथ श्री 1008 आदिनाथ स्वामी का जन्म कल्याणक आ रहा है। समूचे भारत की सकल जैन समाज से दिगंबर जैन समाज सामाजिक सांसद के युवा प्रकोष्ठ प्रवक्ता राजेश जैन दद्दू ने की अपील की है कि इस दिन सभी जगह की समाज विशेष रूप से जुलूस अपने-अपने नगर में प्रभात फेरी, निकालकर खुशियां मनाएं। मिष्ठान वितरण करके अपने निवास को सुसज्जित करते हर्षोल्लास के साथ प्रभु जी का विशेष अभिषेक का आयोजन करें। घरों में पांच दीपक लगाएं। जन-जन तक इस आयोजन को गुंजायमान कर नमोस्तु शासन जयवंत हो का जय घोष करें।

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