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साधना ही साधक को महान बनाती हैः – मुनि सुधासागर जी

मंदिर पाठशाला है और घर प्रयोगशाला

समयसार प्रशिक्षण शिविर का समापन 

ललितपुर. राजीव सिंघई । श्री अभिनन्दनोदय अतिशय तीर्थ में श्रमण निर्यापक मुनिपुंगव सुधासागर महाराज ने धर्मपिपासुओं को संबोधित करते हुए कहा है कि सुख पूर्णता में है। हमें मोक्ष का आनंद लेना है, पर नहीं ले पायेंगे क्योंकि यह कलिकाल है। कलिकाल में पूर्ण सुख नहीं, मोक्ष भी नहीं। हम दुखों से मुक्त होना चाहते हैं, पर नहीं हो पायेंगे क्योंकि प्रकृति अपना नियम नहीं बदल सकती। प्रकृति कहती है, कितनी भी साधना कर लो पर मोक्ष की प्राप्ति नहीं हो सकती। तो क्या हम साधना

करना छोड़ दें, अच्छी भावनायें करना छोड़ दें। भक्त कहता है कि मैं भगवान बनने की इच्छा नहीं छोड़ पाऊंगा, चाहे साक्षात भगवान भी कहें। उधर प्रकृति ने घोषणा कर दी कि लाख उपाय कर लें, पर कलिकाल में भगवान नहीं बन पाओगे। अब दोनों में कौन पीछे हटे। प्रकृति ने कहा- साधना करते रहो क्योंकि किया गया पुरुषार्थ कभी व्यर्थ नहीं जाता। आज मोक्ष नहीं, पर मोक्ष का मार्ग तो है। धीमी गति है पर रास्ते पर हूं। भगवान नहीं बन सकता, पर भगवान को पहचान तो लिया। ये क्या कम खुशी की बात है। चाल चींटी की, पर सच्चे रास्ते पर है। जब भी रास्ते खुलेंगे, मोक्ष का दरवाजा खुलेगा। सबसे पहले पहुंचने वालों में तुम्हारा नाम भी होगा। साधना ही साधक को महान बनाती है।

मुनिश्री ने आगे कहा कि मंदिर पाठशाला है और घर प्रयोगशाला। मंदिर में हम भगवान के सामने शान्त बैठते हैं, क्रोध भी नहीं करते अहंकार भी नहीं। क्योंकि हम भगवान के मंदिर में बैठे हैं। भगवान के सामने शान्त चित्त रहना बहुत बड़ी उपलब्धि है। मंदिर में किया गया आचरण बाहर भी झलकना चाहिए। यही मंदिर जाने की उपलब्धि है।

मुनिपुंगव सुधासागर महाराज ने कहा कि आज का मानव बहुरूपिया है। कहां, किससे, कैसा काम निकालना है, वैसा ही रूप बना लेता है। भगवान के सामने भोला भाला, पर संसार में नाना रूपों को धारण करके अपना काम सिद्ध करता रहता है। कभी क्रोधी बन जाता है, कभी मानी, कभी मायावी तो कभी लोभी, कभी क्षमाशील,कभी विनम्र, कभी सरल तो कभी पवित्र। इस मौका -परस्ती के कारण वह दुखी है। कार्यक्रम का संचालन महामंत्री डा. अक्षय टडैया ने किया।

गुरुवार को समयसार प्रशिक्षण शिविर का समापन परीक्षा के साथ हो गया।

इसके पूर्व प्रातःकाल मूलननायक अभिनंदनाथ भगवान का श्रावकों ने अभिषेक किया। इसके उपरान्त मुनि श्री के मुखारविन्द से शान्तिधारा तरुण काला मुम्बई, चंदावाई संदीप सरार्फ, सुरेशचंद उमेश चंद माली, शांतिदेवी डा. डीके जैन, कमलेश संजीव जैन सांगानेर,ब्र.सरिता,ब्र. आभा के आरोग्यार्थ,नीतू संजय सोगानी डीमापुर, पारस रिषभ केमिकल्स गोधा परिवार किशनगढ़ एवं बसंतीलाल वरमंडा कोटा के द्वारा हुई। तदुपरान्त श्रावक श्रेष्ठि परिवारों ने आचार्य श्री के चित्र का अनावरण एवं मुनि श्री का पादप्रक्षालन कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया।

गुरुवार को निर्यापक मुनि श्री सुधासागर महाराज को आहार मनोज मोदी मोबाइल परिवार,मुनि पूज्यसागर महाराज को आहार पवन शिवाजी परिवार, ऐलक धैर्यसागर को आहार मृदुला, राहुल कलरैया परिवार एवं क्षुल्लक गम्भीर सागर महाराज को आहारदान का पुर्ण्याजन शीलचंद अध्यापक परिवार को मिला।

 

 

मुनि सुधासागर महाराज का उपकार कभी चुकाया नहीं जा सकताः पूज्यसागर महाराज

 

शान्तिधारा के उपरान्त जनमानस को संबोधित करते हुए नगर गौरव पूज्यसागर महाराज ने कहा कि कई युगों के बाद मुनि सुधासागर महाराज जैसे संत पैदा होते हैं जिन्होंने हर क्षेत्र में जिन शासन की प्रभावना की है। संस्थान के माध्यम से हजारों विद्वान तैयार किए हैं जो आज धर्म प्रभावना कर रहे हैं। इनका उपकार कभी नहीं चुकाया जा सकता है।

मुनि पूज्यसागार ने आगे कहा कि अगर धनिक वर्ग अपने बच्चों को संस्थान में पढ़ाएं तो आज की पीढ़ी संस्कारवान होकर अपने जीवन को भी सुखमय बनायेगी और आगे आने वाली पीढ़ी भी संस्कारित बनेगी।

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