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तनाव प्रबंधन के लिए बौद्धिकता के साथ भावनात्मकता भी जरूरीः एक्सपर्ट प्रेम सिंह ने बताए तनाव से निपटने के खास सूत्र


तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर टीचिंग, लर्निंग एंड डवलपमेंट- सीटीएलडी की ओर से ट्रांसफॉर्मिंग लर्निंग, लीडरशिप एंड डवलपमेंट इन अ रैपिडली चेंजिंग वर्ल्ड पर दो दिनी अंतर्राष्ट्रीय ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस में तनाव प्रबंधन पर विचार मंथन हुआ। मुरादाबाद से पढ़िए, प्रो. श्याम सुंदर भाटिया की यह रिपोर्ट…


मुरादाबाद। जेके ऑर्गनाइजेशन के प्रेसिडेंट- ग्रुप सीएचआरओ प्रेमसिंह ने कहा कि आज के युवाओं के लिए तकनीकी दक्षता के साथ नेतृत्व, नैतिकता और भावनात्मक बुद्धिमत्ता भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि मशीनों के पास डेटा हो सकता है, लेकिन उनके पास नैतिकता और सहानुभूति नहीं होती। नेतृत्व का अर्थ केवल पद नहीं, बल्कि जिम्मेदारी लेना और टीम को साथ लेकर चलना है। युवाओं को कॉलेज के दिनों से ही टीम वर्क और निर्णय लेने की क्षमता विकसित करनी चाहिए। उन्होंने कहा, तनाव प्रबंधन के लिए आईक्यू से ज्यादा ईक्यू जरूरी है। जो युवा दूसरों की भावनाओं को समझकर प्रतिक्रिया देते हैं, वे संकट के समय बेहतर प्रदर्शन करते हैं। कॉरपोरेट जगत में ईमानदारी और नैतिक मूल्यों के महत्व को बताते हुए उन्होंने कहा, सफलता अगर गलत रास्तों से मिले तो वह स्थायी नहीं होती। श्री सिंह तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के सेंटर फॉर टीचिंग, लर्निंग एंड डवलपमेंट- सीटीएलडी की ओर से ट्रांसफॉर्मिंग लर्निंग, लीडरशिप एंड डवलपमेंट इन अ रैपिडली चेंजिंग वर्ल्ड पर दो दिनी अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। भारतीय सोसायटी फॉर ट्रेनिंग एंड डवलपमेंट-आईएसटीडी के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन में भारत, अमेरिका और यूएई सहित विभिन्न देशों के प्रतिष्ठित शैक्षणिक एवं औद्योगिक संस्थानों से शिक्षाविदों, उद्योग विशेषज्ञों, शोधार्थियों और स्टूडेंट्स शामिल रहे।

बतौर गेस्ट ऑफ ऑनर एवं आईएसटीडी के नेशनल प्रेसिडेंट अतुल शाह ने प्रशिक्षण एवं विकास को राष्ट्र निर्माण का आधार बताते हुए कहा कि सतत अधिगम ही पेशेवर उत्कृष्टता की कुंजी है। सेकेंड गेस्ट ऑफ ऑनर आईआईएम अहमदाबाद के एल्युम्नस एवम् नयन पारिख एंड कंसल्टेंट्स के नयन पारिख ने कहा कि नेतृत्व का वास्तविक अर्थ दूसरों को उनकी क्षमता पहचानने और उसे साकार करने के लिए प्रेरित करना है। टीएमयू के कुलपति प्रो. वीके जैन ने कहा, भविष्य उन्हीं संस्थानों का उज्जवल है, जो शिक्षा को उद्योग, शोध और सामाजिक उत्तरदायित्व से प्रभावी रूप से जोड़ते हैं। डीन एकेडमिक्स प्रो. मंजुला जैन ने कहा, उच्च शिक्षा संस्थानों को बदलती वैश्विक आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षण पद्धतियों में सतत सुधार करना होगा। सीटीएलडी के निदेशक प्रो. पंकजकुमार सिंह ने कहा, वर्तमान समय में शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि नेतृत्व क्षमता, नवाचार और वैश्विक दृष्टिकोण का विकास करना भी है।

डिजिटल दक्षताओं की उपयोगिता पर विचार साझा

अंतरराष्ट्रीय वक्ताओं में एएमडॉक्स यूएई/मिडिल ईस्ट रीजन में डायरेक्टर, पीजीएम, एआई इनोवेशन एंड ऑटोमेशन हिमांशु जेसी वाडिया ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और ऑटोमेशन की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया, तकनीक शिक्षा और उद्योग दोनों के स्वरूप को पुनर्परिभाषित कर रही है। यूनिवर्सिटी ऑफ कंबरलैंड्स, अमेरिका की डेटा सॉल्यूशन इंजीनियर भीमिका शाह ने डेटा एनालिटिक्स, वैश्विक शिक्षण मानकों और डिजिटल दक्षताओं की उपयोगिता पर विचार साझा किए। राष्ट्रीय वक्ताओं में रानी दुर्गावती यूनिवर्सिटी के कार्यवाहक कुलसचिव प्रो. सुरेन्द्रसिंह, बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी की डॉ. अपर्णा सिंह, कॉजेंट इन्फोटेक के सीनियर डायरेक्टर श्री अनंत अग्रवाल, इन्फिनिटी मैनेजमेंट एंड इंजीनियरिंग कॉलेज की प्राचार्या डॉ. नवदीप कौर सलूजा, रिलायंस पावर एवम् कोल इंडिया लिमिटेड के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी सुधीरचंद्र जैन, आईएसटीडी (नॉर्थ) की रीजनल वाइस प्रेसिडेंट अंकिता शर्मा ने भी अपने अनुभव साझा किए।

देश-विदेश से प्राप्त शोध-पत्रों की प्रस्तुतियों ने अनुसंधान निष्कर्ष दिए

कॉन्फ्रेंस के चार तकनीकी सत्रों में टेक्नोलॉजी, इन्नोवेशन एंड रिसर्च, स्किल्स डवलपमेंट एंड एम्प्लॉयबिलिटी, ग्लोबल पर्सपेक्टिव्स एंड कोलैबोरेशन, लीडरशिप इन अ डिसरप्टिव एरा, लर्निंग एंड पेडागॉजिकल ट्रांसफॉर्मेशन और सस्टेनेबिलिटी एंड सोशल इम्पैक्ट जैसे समकालीन विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। साथ ही देश-विदेश से प्राप्त शोध-पत्रों की प्रस्तुतियों ने अनुसंधान निष्कर्ष साझा करने, अकादमिक विमर्श को आगे बढ़ाने और वैश्विक विशेषज्ञों से सार्थक प्रतिपुष्टि प्राप्त करने का उत्कृष्ट अवसर प्रदान किया। कॉन्फ्रेंस में एसएनजीएपी सिएम कॉलेज- मेघालय, इंस्टीट्यूट ऑफ डिजास्टर मैनेजमेंट एंड फायर साइंस- चंडीगढ़, आईआईएलएम यूनिवर्सिटी- ग्रेटर नोएडा, एडोव सिस्टम्स इंडिया प्रा.लि., आईएमएस यूनिसन यूनिवर्सिटी- देहरादून, एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी- पुणे आदि के करीब 500 प्रतिभागी शामिल रहे। अंत में सीटीएलडी के उपनिदेशक एवं कन्वीनर डॉ. दिलीप दत्त वार्ष्णेय ने वोट ऑफ थैंक्स दिया। कॉन्फ्रेंस में सह-कन्वीनर एवं मास्टर ट्रेनर ऋतु राजन के अलावा सीटीएलडी के सभी ट्रेनर्स मौजूद रहे। संचालन निधि गुप्ता ने किया।

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