तपस्वी के तप को स्वयं तीर्थंकर परमात्मा भी नमन करते हैं क्योंकि तप आत्म शुद्धि का महानतम मार्ग होता है। तभी तो आदि अनादि काल से हर धर्म मजहब संप्रदाय में तप को महान बताया गया। साथ ही तपस्वी के तप साधना आत्मा को परमात्मा से मिलाने का कार्य करती है। यह बात अखिल भारतीय श्री जैन श्वेतांबर मालवा महासंघ के राष्ट्रीय पदाधिकारी राजेंद्र बोकड़िया ने कही। नागदा (धार) से पढ़िए, यह खबर…
नागदा (धार)। तपस्वी के तप को स्वयं तीर्थंकर परमात्मा भी नमन करते हैं क्योंकि तप आत्म शुद्धि का महानतम मार्ग होता है। तभी तो आदि अनादि काल से हर धर्म मजहब संप्रदाय में तप को महान बताया गया। साथ ही तपस्वी के तप साधना आत्मा को परमात्मा से मिलाने का कार्य करती है। यह बात अखिल भारतीय श्री जैन श्वेतांबर मालवा महासंघ की ओर से भीषण गर्मी में वैशाली ओरा सहित बाल तपस्वी अयांशी एवं आर्वी ओरा के नवाणु यात्रा तप पूर्ण होने पर आयोजित तप अभिनंदन समारोह कार्यक्रम में महासंघ के राष्ट्रीय पदाधिकारी राजेंद्र बोकड़िया ने कही।
उन्होंने कहा कि हमारे संत, महात्मा, ऋषि, मुनियों के बताए तप के मार्ग जिसका अनुसरण करते हुए बाल तपस्वियों ने भीषणतम गर्मी में सिद्ध गिरिराज शत्रुंजय महातीर्थ पालीताणा तीर्थ की नवानू यात्रा पूर्ण की। वह अनुमोदनीय एवं प्रेरणादायक है। छोटी सी उम्र में इतनी कठिन तपस्या जिसके तहत करीब 1000 से भी ज्यादा सीढ़ियां चढ़कर दादा आदिनाथ भगवान के मंदिर में दर्शन वंदन करते हुए वापस उतरना, यह क्रिया प्रतिदिन दो तीन बार करते हुए 45 दिनों में पूर्ण करना होती है। साथ ही प्रति दिन प्रातः राय प्रतिक्रमण एवं सायंकाल देवसीय प्रतिक्रमण कर तप आराधना की जाती है।
तपस्वियों के तप अनुमोदनार्थ महिला चौबीसी का आयोजन कर तपस्वी का अखिल भारतीय श्री जैन श्वेतांबर मालवा महासंघ राष्ट्रीय पदाधिकारी राजेंद्र बोकड़िया, दिलीप कोठारी, प्रणीत चोरड़िया, संगीता बोकड़िया, सुलोचना बाफना सहित पदाधिकारियों ने शॉल श्रीफल एवं अभिनंदन पत्र भेंटकर बहुमान किया। अभिनंदन पत्र का वाचन भूपेंद्र जैन ने किया।













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