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जानलेवा साबित हो सकता है हीट स्ट्रोक लू लगने का इलाज जितना जल्दी हो सके करें


हीट स्ट्रोक या लू लगना क्या है। इस बारे में फिजियोथैरेपिस्ट स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय ललितपुर एन डी सी सेल में तैनात डॉ रिजु दुबे पाठक का कहना है कि हम दिन ब दिन बढ़ती हुई गर्मी और तपन का सामना कर रहे हैं ।अभी 25 मई से 2 जून तक नौतपा हैं। जिसमें गर्मी अपने रौद्र रूप में रहेगी ।कुछ विशेष सावधानियां रख के हम लू से बच सकते हैं। हीट स्ट्रोक चिकित्सा में आपातकालीन स्थिति है । पढि़ए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट ……


ललितपुर। हीट स्ट्रोक या लू लगना क्या है। इस बारे में फिजियोथैरेपिस्ट स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय ललितपुर एन डी सी सेल में तैनात डॉ रिजु दुबे पाठक का कहना है कि हम दिन ब दिन बढ़ती हुई गर्मी और तपन का सामना कर रहे हैं ।अभी 25 मई से 2 जून तक नौतपा हैं। जिसमें गर्मी अपने रौद्र रूप में रहेगी ।कुछ विशेष सावधानियां रख के हम लू से बच सकते हैं। हीट स्ट्रोक चिकित्सा में आपातकालीन स्थिति है जो तब होती है जब लंबे समय तक उच्च तापमान ,गर्म और आर्द्र स्थिति में शारीरिक परिश्रम के कारण शरीर का मुख्य तापमान सामान्य स्तर से 104 डिग्री या 40 डिग्री सेंटीग्रेड से ऊपर उठ जाता है ।हीट स्ट्रोक गर्मी से संबंधित बीमारी का एक गंभीर रूप है, जो मस्तिष्क हृदय, किडनी व अन्य अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है। हीट स्ट्रोक का तुरंत इलाज न होने पर यह जानलेवा भी हो सकता है।

 हीट स्ट्रोक के लक्षण

हीट स्ट्रोक के लक्षण है उच्च शारीरिक तापमान 104 डिग्री या 40 डिग्री सेंटीग्रेड से अधिक, बदली हुई मानसिक स्थिति ,सुखी या गरम चकत्तेदार लाल त्वचा ,उल्टी ,मितली, बढ़ती हृदय की धड़कन , बढ़ती हुई श्वसन दर ,अत्यधिक प्यास, सर दर्द ,बेहोशी, मांसपेशियों में ऐंठन ,दर्द ,आंखें बोझिल होना कभी-कभी ये लक्षण अन्य स्थितियों के समान दिख सकते हैं ।इसके अलावा कुछ लोगों में हीट स्ट्रोक होने से पहले थकावट के हल्के लक्षण महसूस होते हैं,जैसे जीभ सूख जाना , बोलने में तकलीफ, मतिभ्रम होना इस प्रकार के किसी भी लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टरी परामर्श ले ( ‌बिना डॉक्टर परामर्श के कोई भी दवाई स्वयं ना लें) लू लगने का इलाज जितना जल्दी हो सके करें। किसी ठंडी जगह पर जाकर बैठ जाए या लेट जाएं। संभव हो तो ठंडा पानी हाथ में ले ,ठंडा पानी पी ले ।कपड़े को ठंडे पानी में भिगोकर सर पर और तलवों पर रखें। ठंडे पानी को थोड़ा-थोड़ा करके पिएं। कैफीन आदि पदार्थ से दूर रहे। शक्कर- नमक के पानी का घोल पिएं ।किसी भी प्रकार की ज्यादा शारीरिक गतिविधि ना करें ,शरीर को आराम दे, बाहर से आकर तुरंत ठंडा पानी न पिएं। प्रयास करें फ्रिज की जगह मटके का पानी ही पिएं।

लू से बचाव

1 दिन में 6 से 7 लीटर पानी प्रतिदिन पिए,दोपहर की धूप में प्रयास करें बाहर न निकले, निकले तो सूती वस्त्र पहनकर, कानों को ढक कर,आंखों में चश्मा लगाकर, छाता ले कर ही जाए। अत्यधिक पानी का सेवन करें ।आम का पना , बेल का शरबत, गन्ने का शरबत ,नींबू की शिकंजी आदि तरल पदार्थ का सेवन करें। तरबूज, खीरा, प्याज ,सलाद इनको अपने रोज के आहार में बड़ा स्थान दें ।रात के खाने में हल्का भोजन ले ,अगर समस्या ज्यादा है तो स्वयं से कोई भी दवाई या इलाज न करें। तुरंत डॉक्टरी परामर्श लें ।

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