गणिनी आर्यिका श्री सुपार्श्वमति जी की समाधि स्थली श्री चंद्रप्रभ जिनालय में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 36 साधु सहित ग्रीष्मकालीन वाचना के लिए विराजित हैं। पिछले चार माह से आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य से जयपुर की धरा धन्य हो रही है। पढ़िए, जयपुर से डॉ.राजेश पंचोलिया की रिपोर्ट…
जयपुर। गणिनी आर्यिका श्री सुपार्श्वमति जी की समाधि स्थली श्री चंद्रप्रभ जिनालय में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 36 साधु सहित ग्रीष्मकालीन वाचना के लिए विराजित हैं। पिछले चार माह से आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य से जयपुर की धरा धन्य हो रही है। गुरुवर के वात्सल्य, आशीर्वाद और उपदेशों से सभी को बहुत धर्मलाभ मिला है। गुरुभक्त सुरेश सबलावत ने बताया कि 10 जून को प्रातः 8 से 10 बजे तक सभी मंदिर गुरुचरणों में अपनी श्रद्धा, भक्ति और कृतज्ञता अर्पित कर तथा विनम्र निवेदन करेंगे कि जयपुर को उनके सान्निध्य का लाभ आगे भी मिलता रहे। असम गुवाहाटी के भागचंद, सुनीता चूड़़ीवाल सहित समस्त चूड़़ीवाल परिवार ने आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सानिध्य में जयपुर बड़ के बालाजी चंद्रपुरी में मंगलवार को श्री चंद्रप्रभ भगवान का पंचामृत अभिषेक और पूजन किया।
दोपहर को मंडल विधान का पूजन हुआ। आचार्य संघ सानिध्य में प्रातः काल भगवान श्री चंद्रप्रभ का भव्य पंचामृत अभिषेक जल, नारियल पानी, शर्करा, विभिन्न फलों और सूखे मेवों के रसों, दूध, घी, दही, सर्वाेषधि, विभिन्न पुष्प केशर, सुगंधित जल, चार कलश से शांतिधारा हुई। यहां यह उल्लेखनीय है कि प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज के प्रथम पट्टाचार्य श्री वीरसागर जी महाराज से दीक्षित गणिनी आर्यिका श्री सुपार्श्व मतीजी चूड़ीवाल परिवार की है। गणिनी आर्यिका श्री सुपार्श्व मति जी की समाधि इसी स्थान पर हुई। भव्य मंदिर के साथ वैराग्य का दिग्दर्शन प्रतीक समाधिस्थल भी बनाया गया हैं।
आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 10 वर्षों बाद छठी बार वर्ष 2026 में, 10 मुनिराज, 20 आर्यिका, 1 ऐलक, 3 क्षुल्लक 34 साधु सहित जयपुर में मंगल प्रवेश हुआ। इसके पूर्व सन 1969 में दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्म सागर जी के साथ आपने वर्षायोग किया था। आचार्य श्री वर्धमान सागरजी ने आचार्य बनने के बाद सन 1999 में भट्टारक जी की नसिया में चातुर्मास किया था। उसी वर्ष में क्षुल्लिका और आर्यिका दीक्षा श्री अचल मति को और श्री नमित सागरजी को ऐलक दीक्षा दी थी तथा आर्यिकाश्री अचल मति और आर्यिका श्री सरस्वती मति जी 2 साधुओं की समाधि हुई। वर्ष 2000 में नेमीनगर कॉलोनी में पंच कल्याणक प्रतिष्ठा की। उसी में मुनि श्री देवेंद्र सागर और मुनि श्री देवेश सागर जी को मुनि दीक्षा प्रदान की। वर्ष 2014 में श्यामनगर जयपुर में पंच कल्याणक प्रतिष्ठा हुई। वर्ष 2016 में बड़के बालाजी में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं आर्यिका श्री गुप्तिमति जी की दीक्षा और आर्यिका श्री रिद्धि मति की समाधि हुई। वर्ष 2026 मंगलम सिटी में सलूम्बर के पति पत्नी ने दीक्षा ली।
आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने मालवीय नगर जयपुर के पुत्रः एवं पिता को क्रमशः मुनि श्री हितेंद्र सागर जी एवं मुनि श्री भुवन सागर दीक्षा देकर बनाया। आचार्य श्री ने जयपुर निवासी मुनि श्री विवर्जित सागर जी एवं जयपुर निवासी मुन्नालाल टकसाली को दीक्षा देकर मुनि श्री गुणोदय सागर बनाया। प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी एवं पूर्वाचार्यों से जयपुर के निवासियों ने दीक्षा लेकर आत्म कल्याण किया है।













Add Comment