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गुरु-शिष्य मिलन ने किया भाव-विभोर : पुष्पगिरी तीर्थ पर छलक पड़े आंसू, बोले अंतर्मना गुरुदेव—’गुरु से मिलने नहीं, गुरु में मिलने आया हूं’


पुष्पगिरी तीर्थ में आचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी और उनके शिष्य अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी का भावपूर्ण मिलन श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय बन गया। गुरु-शिष्य के स्नेह, श्रद्धा और वात्सल्य ने सभी को भाव-विभोर कर दिया। पढ़िए श्रीफल साथी रोमिल पाटनी की यह रिपोर्ट।


सोनकच्छ/पुष्पगिरी। मानव कल्याण स्थली पुष्पगिरी तीर्थ पर आचार्य श्री 108 पुष्पदंत सागर जी महामुनिराज के सुयोग्य शिष्य, सिंह निष्क्रिय व्रतधारी ‘अंतर्मना’ आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी मुनिराज, संघस्थ उपाध्याय मुनि श्री 108 पीयूष सागर जी महाराज ससंघ का महामंगल प्रवेश हुआ। इससे पूर्व आकाश जैन गुरुभक्त परिवार, भागीरथ एवेन्यू कॉलोनी, सोनकच्छ से बैंड-बाजों के साथ भव्य मंगल विहार निकाला गया, जिसका विभिन्न सामाजिक, धार्मिक एवं राजनीतिक संस्थाओं ने स्वागत किया।

भावुक हुआ गुरु-शिष्य मिलन

दोपहर 3:45 बजे आचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी और उनके शिष्य आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी का भावपूर्ण मिलन हुआ। शिष्य ने संघ सहित तीन परिक्रमा लगाकर गुरु चरणों में वंदन किया और आशीर्वाद प्राप्त किया। दोनों संत जब एक-दूसरे के गले मिले तो उनकी आंखें नम हो गईं। यह दृश्य देखकर उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और पूरा तीर्थ “गुरु-शिष्य की जय” के जयघोष से गूंज उठा।

पुष्पवर्षा से हुआ स्वागत

पुष्पगिरी तीर्थ पहुंचने पर विद्यालय एवं महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने पुष्पवर्षा कर संतों का स्वागत किया। गुरु और शिष्य एक-दूसरे का हाथ थामकर मंच तक पहुंचे, जहां अंतर्मना गुरुदेव सहित संघ ने आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन कर गुरुरज मस्तक पर धारण की। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।

गुरु ही परमात्मा तक पहुंचने का मार्ग

अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी ने अपने संबोधन में कहा, “भरोसा करना है तो गुरु पर करो, क्योंकि परमात्मा तक पहुंचने का मार्ग गुरु ही बताते हैं। मैं गुरु से मिलने नहीं, गुरु में मिलने आया हूं। जीवन में देव, शास्त्र और गुरु के अतिरिक्त सब अशरण हैं। गुरु ने अपनाकर हमें अनमोल बना दिया।”

प्रेम से ही बनता है व्यक्तित्व

आचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी महामुनिराज ने कहा कि परमात्मा प्रत्येक जीव के भीतर विद्यमान हैं। उन्होंने कहा, “शिष्य से मिलने से पहले मेरी आंखों से भी आंसू बह रहे थे। बीज छोटा होता है, लेकिन प्रेम रूपी खाद और पानी मिलने पर वही विशाल वटवृक्ष बन जाता है। प्रसन्न सागर वही बीज हैं, जो आज वटवृक्ष बन गए हैं।”

अनेक गणमान्यजन रहे उपस्थित

कार्यक्रम में विधायक डॉ. राजेश सोनकर, पुष्पगिरी समन्वयक सुभाष जैन, आकाश जैन, जैन समाज अध्यक्ष महेन्द्र पाटोदी सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। संचालन उपाध्याय मुनि श्री 108 पीयूष सागर जी महाराज ने किया तथा आभार पुष्पगिरी अध्यक्ष प्रकाश अजमेरा ने व्यक्त किया।

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