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पंच कल्याण महोत्सव का चौथा दिन : भगवान का तप कल्याण धूमधाम से संपन्न हजारों श्रद्धालु पहुंचे


श्री दिगंबर जैन मंदिर लार में पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के मंगल पावन सानिध्य मे चल रहे छह दिवसीय पंचकल्याणक महोत्सव के चौथे दिन भगवान का तप कल्याणक महोत्सव एवं आचार्य पदारोहण दिवस बड़े ही भक्तिभाव से मनाया गया।बड़ागांव धासन से पढ़िए, यह खबर…


 बड़ागांव धासन। श्री दिगंबर जैन मंदिर लार में पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के मंगल पावन सानिध्य मे चल रहे छह दिवसीय पंचकल्याणक महोत्सव के चौथे दिन भगवान का तप कल्याणक महोत्सव एवं आचार्य पदारोहण दिवस बड़े ही भक्तिभाव से मनाया गया।

नगर के स्कूल परिसर पर अयोध्या नगरी में चल रहे पंचकल्याणक महोत्सव में सुबह के समय जाप्यानुष्ठान, अभिषेक,विश्व मे शांति भाईचारे एवं जगत कल्याण के लिये महाशांतिधारा करने का महा सौभाग्य सवाई चौधरी ज्ञान चंद्र मनीष जैन,जगदीप जी पन्नालाल जैन देवासा,राजीव निराला को प्राप्त हुआ। नित्य नियम पूजन, जन्मकल्याणक पूजन,नवग्रह शांति यज्ञ के कार्यक्रम सम्पन्न हुए।चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्जवन किया गया। इसके बाद आचार्य श्री के मंगल प्रवचन हुए जिसके बाद तप कल्याणक के अंतर्गत बालक आदिकुमार से राजा बने भगवान ने मनुष्यों को असि, मसि, कृषि, शिल्प, वाणिज्य और कला की शिक्षाएं आमजन की जीवन यापन के लिए प्रदान की । उन्होंने लोगों को ईमानदारी, अनुशासन व धर्म परायण में रहते हुए जीवन बिताने का संदेश दिया।

राजा को दरबार में नीलांजना का नृत्य देखकर वैराग्य उत्पन्न हुआ और दीक्षा लेने के लिए वन की ओर चल दिए। इसको देखकर माता मरु देवी अश्रुपूरित नेत्रों से भगवान को रोकने का प्रयास करती है। यह दृश्य देखकर पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। वैराग्य के दृश्य से महिलाओं के नेत्रों से अश्रुधारा बहने लगी। आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ने श्रावक-श्राविकाओं को तप का महत्व समझाते हुए कहा कि तप कल्याण के समय भगवान आदिकुमार की पालकी को उठाने को लेकर देवताओं और मनुष्यों में विवाद हो गया। दोनों वर्ग पालकी उठाना चाहते थे। देवता लोग संयम धारण नहीं कर सकते । अतः ये अधिकार मनुष्यों का है। इसलिए मनुष्यों को अपने जीवन की श्रेष्ठता को समझते हुए श्रेष्ठ तप द्वारा जीवन को सार्थक बनाना चाहिये। दोपहर में 32000 मांडलिक राजाओं की भव्य राज दरबार लगा और भगवान आदिकुमार का राज्याभिषेक किया गया।

सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए

भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ प्रभु के वैराग्य दृश्यों का मंचन किया गया। किस प्रकार से राजा आदि कुमार को वैराग्य उत्पत्ति होती है और वह सांसारिक सुख को त्याग कर राजपाट को त्याग कर वन विहार कर लेते हैं कार्यक्रम को सफल बनाने में क्षेत्रीय जैन् समाज के साथ साथ सुनील जैन पूर्व विधायक सागर, निधि जैन प्रबंध सम्पादक दैनिक आचरण सागर,बाबूलाल मैनवार,जितेन्द्र क्रांतिकारी,वीर चंद्र नेकोरा,राजकुमार पठा सहित सैकड़ों श्रदालु मौजूद रहे।

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