बुंदेलखंड के हजारों वर्ष प्राचीन अतिशय क्षेत्र बंधा जी में बंधा जी महोत्सव का आयोजन 24 मार्च से चल रहा है। रविवार को अजितनाथ भगवान के निर्वाण महोत्सव के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ। पढ़िए राजीव सिघाई विशेष रिपोर्ट…
बंधा जी। बुंदेलखंड के हजारों वर्ष प्राचीन अतिशय क्षेत्र बंधा जी में बंधा जी महोत्सव का आयोजन 24 मार्च से चल रहा है। रविवार को अजितनाथ भगवान के निर्वाण महोत्सव के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ। पांच मुनिराज बंधाजी की पावन धरा पर विराजमान हैं। उनके ही सानिध्य में यह महोत्सव चल रहा था। रविवार को प्रातः 7:30 श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा, नित्य पूजा संपन्न हुई। सैकड़ों लोगों ने मूलनायक अजितनाथ भगवान का महामस्तकाभिषेक किया। दोपहर 2:00 बजे तक मूलनायक भगवान का अभिषेक अनवरत चलता रहा।
धर्मसभा को किया संबोधित
8:30 से मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज के प्रवचन शुरू हुए। मुनि श्री ने अपने प्रवचनों में कहा कि आज हम सभी बंधा जी के बाबा अजितनाथ का निर्वाण महोत्सव मना रहे हैं आज से लाखों वर्ष पहले जैन धर्म के द्वितीय तीर्थंकर अजितनाथ नाथ भगवान को शिखर सम्मेद से मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। चैत्र सुदी पंचमी को बंधा जी में हर वर्ष अजितनाथ भगवान का निर्वाण कल्याणक मनाया जाता है। मुनि श्री ने कहा कि मेरे जीवन का यह पहला अवसर है, जब मुझे 5 महाराजों के साथ अजितनाथ भगवान का निर्वाण महोत्सव मनाने का अवसर मिला। मुनि श्री ने कहा कि आप लोगों में बंधा जी वाले अजितनाथ के प्रति अटूट श्रद्धा है, जो मैं देख रहा हूं। आज बुंदेलखंड सहित अनेक अंचलों के लोग यहां महामस्तकाभिषेक करने आए हैं।
मुनि श्री ने कहा कि माता-पिता का हमारे जीवन में बहुत बड़ा उपकार होता है। परमपिता परमात्मा का भी हमारे जीवन में बहुत बड़ा उपकार होता है। हमें अपने जीवन को अच्छा बनाने में अपने परिवार की आवश्यकता भी पड़ती है। तभी हम अपने जीवन को सुव्यवस्थित तरीके से जी सकते हैं। मुनि श्री ने कहा कि आप लोगों का पुण्य बहुत तीव्र है। जैन धर्म में गौतम स्वामी हुए, भगवान महावीर स्वामी हुए, ये लोग जन्म से जैन नहीं थे। ये महान पुण्य आत्मा तो जैन दर्शन को अपना कर जैन बने। आप लोग तो जन्म से ही जैन हैं। अपने जैन पर्याय को सार्थक करो। अपनी आत्मा का कल्याण करो, तभी अजितनाथ भगवान का निर्वाण महोत्सव सार्थक होगा।

निर्वाण लाडू चढ़ाया
इसके बाद दोपहर 1:00 बजे अजितनाथ भगवान का निर्वाण महोत्सव मनाया गया निर्वाण लाडू भी चढ़ाया गया। 3:30 बजे से रथयात्रा मूल मंदिर से शुरू हुई जो वेदी प्रांगण पहुंची, जहां पर श्रीजी का अभिषेक किया गया। 6 अप्रैल को बंधा जी में पूर्णमासी के दिन मनवांछित रिद्धि-सिद्धि पूर्णमासी कलश मुनि श्री के सानिध्य में स्थापित किए जाएंगे। जिसके लिए देशभर से हजारों लोगों ने ऑनलाइन एवं ऑफलाइन कलश आरक्षित करा दिए हैं। एक महीने तक सभी कलश मंदिर जी में रख कर अभिमंत्रित होंगे। अगली पूर्णमासी को इन कलशों को लोगों को घर ले जाने के लिए दिया जाएगा।













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