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एक्सपर्ट्स बोले इन्नोवेशंस ही सफलता की कुंजी : कम्प्यूटर साइंस एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन की ओर से मॉडर्न ट्रेंड्स इन कम्प्यूटर्स एंड इलेक्ट्रॉनिक्स पर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस शुरू


तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में डिपार्टमेंट ऑफ कम्प्यूटर साइंस एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन की ओर से मॉडर्न ट्रेंड्स इन कम्प्यूटर्स एंड इलेक्ट्रॉनिक्स पर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस- आईसीएमसीई 2026 का आगाज हुआ। मुरादाबाद से पढ़िए, प्रो.श्याम सुंदर भाटिया की यह खबर…


मुरादाबाद। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन- डीआरडीओ के सीनियर साइंटिस्ट डॉ. सुधीर खरे थ्योरीज़, प्रोडक्ट्स, यूनिक आइडियाज़, पेटेंट्स, कोलाबोरेटिव लर्निंग, लर्निंग हेबिट, डिसिप्लिन के प्रति मोटिवेट करते हुए बोले, जीवन में असफलता का कभी ठहराव नहीं होता है। उन्होंने जीवन में चरैवेति-चरैवेति के संग अपडेशन का मूल मंत्र देते हुए कहा कि निरंतर हार्ड वर्किंग का प्रतिफल सफलता ही है। स्टूडेंट्स हमेशा प्रतिभा प्रदर्शन के प्लेटफॉर्म पर निडर होकर अपना पक्ष रखें और सहयोग लेने में भी हिचक न करें। एआई को वरदान बताते हुए उन्होंने उम्मीद जताई। स्टूडेंट्स की क्रिएटिव सोच और ऊर्जा देश की रक्षा और विकास में अनमोल योगदान साबित होगी। साथ ही उन्होंने टीएमयू के स्टूडेंट्स को डीआरडीओ में इंटर्नशिप के लिए न्यौता दिया। वैज्ञानिक डॉ. खरे तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में डिपार्टमेंट ऑफ कम्प्यूटर साइंस एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन की ओर से मॉडर्न ट्रेंड्स इन कम्प्यूटर्स एंड इलेक्ट्रॉनिक्स पर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस- आईसीएमसीई 2026 में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एज कंप्यूटिंग, फोटोनिक्स, एम्बेडेड सिस्टम, वीएलएसआई डिजाइन, साइबर सुरक्षा, क्वांटम कंप्यूटिंग सरीखे विषयों पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही उन्होंने कहा कि डीआरडीओ ने फाइटर जेट, मिसाइल सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा और सेंसर जैसी अत्याधुनिक तकनीकों में उल्लेखनीय योगदान दिया है। ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों में आकाश और ब्रह्मोस मिसाइल, एंटी-ड्रोन सिस्टम तथा हाई-पावर लेजर तकनीकों का सफल प्रदर्शन भारत की बढ़ती सामरिक क्षमता को दर्शाता है। इससे पूर्व मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के संग कॉन्फ्रेंस का शंखनाद हुआ। इस मौके पर मुख्य अतिथि के साथ बतौर कीनोट स्पीकर डॉ. सरत सी. दास, गेस्ट ऑफ ऑनर्स- डॉ. वैभव गुप्ता और अतुल जोशी,, डीन अकेडमिक्स प्रो. मंजुला जैन, सीओई के डीन प्रो. आरके द्विवेदी, कॉन्फ्रेंस कन्वीनर्स- डॉ. अलका वर्मा, प्रो. गुलिस्ता खान, प्रशांत कुमार आदि की गरिमामयी मौजूदगी रही, जबकि कॉन्फ्रेंस में एचओडीज़- डॉ. शुभेन्द्र प्रताप सिंह और डॉ. अशीष सिमल्टी, प्रो. प्रदीप कुमार, प्रो. अशोक कुमार, प्रो. रवि जैन, श्री राहुल विश्नोई आदि भी उपस्थित रहे। अतिथियों ने कॉन्फ्रेंस प्रोसिडिंग का विमोचन भी किया। सभी अतिथियों को शाल ओढ़ाकर और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। तकनीकी सत्रों में कॉन्फ्रेंस के पहले दिन 70 रिसर्च पेपर्स प्रस्तुत किए गए। संचालन डॉ. इंदु त्रिपाठी ने किया।

भारत की 6जी तकनीक में बढ़ती वैश्विक भूमिका

कॉन्फ्रेंस में स्पायर बिजनेस स्कूल बार्सिलोना, स्पेन के डायरेक्टर प्रो. सरत सी. दास ने बतौर की नोट स्पीकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस- एआई पर चेताया, एआई का दुरुपयोग युद्ध और साइबर अपराध जैसे खतरों को बढ़ा सकता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि आज के समय में एआई आधारित टूल्स का उपयोग कर कोई भी व्यक्ति कुछ ही समय में गलत उद्देश्यों के लिए कंटेंट या साइबर हमले तैयार कर सकता है, जिससे वैश्विक सुरक्षा पर खतरा उत्पन्न हो सकता है। उन्होंने ह्यूमन-इन-द-लूप की अवधारणा पर जोर देते हुए कहा कि एआई सिस्टम में मानव नियंत्रण और निगरानी बनाए रखना जरूरी है, ताकि इसके निर्णयों को संतुलित और सुरक्षित बनाया जा सके। साथ ही उन्होंने लर्निंग बाय डूइंग और नवाचार को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। प्रो. सरत ने छात्रों से कक्षा के बाहर भी अपने प्रोजेक्ट्स और प्रयोगों पर कार्य करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि व्यावहारिक ज्ञान और नवाचार ही भविष्य में सफलता की कुंजी हैं। दूरसंचार विभाग के डीसीए-टी श्री अतुल जोशी ने भारत की 6जी तकनीक में बढ़ती वैश्विक भूमिका और नवाचार पहलों पर प्रकाश डाला। जोशी ने 5 जी तकनीक में हुए नवाचार का उल्लेख करते हुए बताया, मात्र 2 किलोग्राम का पोर्टेबल 5 जी कोर विकसित किया गया है, जो लद्दाख और अरुणाचल जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में भी कनेक्टिविटी प्रदान कर सकता है। उन्होंने बताया, दूरसंचार प्रौद्योगिकी विकास निधि के माध्यम से सरकार अकादमिक संस्थानों, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स को 500 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है, जिसके तहत वर्तमान में 120 से अधिक परियोजनाएं विकसित हो रही हैं।

इनक्यूबेशन सेंटर से 50 से अधिक स्टार्टअप विकसित

डीआरडीओ में सीनियर टेक्निकल ऑफिसर डॉ. वैभव गुप्ता ने बतौर गेस्ट ऑफ ऑनर बताया, आधुनिक डिवाइस और रक्षा प्रणालियां अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और इंटीग्रेटेड सर्किट- आईसी तकनीक पर आधारित हैं, जिनमें निरंतर उन्नति हो रही है। डॉ. गुप्ता ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा, वे केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि व्यावहारिक कौशल और परियोजना आधारित सीखने पर ध्यान दें। उन्होंने ड्रीम डिटेक्ट-डिज़ाइन-डवलप के मंत्र के साथ नवाचार की दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित किया और कहा कि अनुसंधान के माध्यम से ही भविष्य की तकनीकों का विकास संभव है। उन्होंने अंत में कहा कि छात्रों को शोध में जुनून के साथ आगे बढ़ना चाहिए। डीन एकेडमिक्स प्रो. मंजुला जैन ने स्टूडेंट्स और रिसर्चर्स के लिए उपलब्ध वित्तीय सहायता एवं नवाचार के अवसरों पर प्रकाश डालते हुए कहा, वर्तमान समय अकादमिक ज्ञान को वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान में बदलने का है। उन्होंने बताया कि छात्रों, शोधकर्ताओं और नवाचारकर्ताओं के लिए 2.5 करोड़ रुपये तक की ग्रांट और प्रोटोटाइप फंडिंग उपलब्ध है, जबकि संस्थान को डीएसटी से 5 करोड़ रुपये तक एवम् एमएसएमई और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय से 1 करोड़ रुपये तक की स्वीकृति प्रदान करने का अधिकार प्राप्त है। उन्होंने कहा, टीएमयू के इनक्यूबेशन सेंटर से 50 से अधिक स्टार्टअप विकसित हो चुके हैं, जो स्वास्थ्य, शिक्षा और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में तकनीक आधारित समाधान प्रदान कर रहे हैं। इन स्टार्टअप्स को विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत 70 लाख रुपये तक की फंडिंग भी प्राप्त हुई है। अंत में उन्होंने स्टुडेंट्स से आह्वान किया, वे नौकरी तलाशने वाले नहीं बल्कि नवाचार करने वाले बनें। सीओई के डीन प्रो. आरके द्विवेदी बोले, कॉन्फ्रेंस ने वैश्विक स्तर पर शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, उद्योग विशेषज्ञों और छात्रों को एक मंच पर लाकर विचार-विमर्श और नवाचार को नई दिशा दी। सम्मेलन का उद्देश्य नवीनतम शोध प्रस्तुत करना, ज्ञान का आदान-प्रदान करना और सार्थक सहयोग को बढ़ावा देना रहा है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, एम्बेडेड सिस्टम, संचार प्रौद्योगिकी और अगली पीढ़ी की कंप्यूटिंग जैसे उभरते क्षेत्रों पर विशेष चर्चा की गई। कॉन्फ्रेंस में डॉ. संकल्प गोयल, डॉ. विभोर भारद्वाज, डॉ. दिप्तोनिल बनर्जी, निकिता जैन, अरुण पिपरसेनिया, नीरज कौशिक, उमेश सिंह, अरुण गुप्ता, केबी आनन्द, मयूर अग्रवाल आदि मौजूद रहे।

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