बड़वानी जिले में व्यवस्थाओं की चूक के कारण दिगंबर जैन मुनि विडंबर सागर महाराज करीब 30 घंटे तक तपती लू और सुनसान जंगलों में भटकते रहे। पुलिस और समाजजनों ने 6 घंटे की तलाश के बाद उन्हें सुरक्षित खोज निकाला। सन्मति जैन काका की रिपोर्ट पढ़िए
इंदौर । आगरा-मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक ऐसी घटना सामने आई जिसने पूरे जैन समाज को भावुक कर दिया। व्यवस्थाओं की कमी और सही मार्गदर्शन नहीं मिलने के कारण दिगंबर जैन मुनि विडंबर सागर महाराज को भीषण गर्मी में जंगल और सुनसान इलाकों में भटकना पड़ा। लगभग 30 घंटे तक वे बिना आहार और जल के विहार करते रहे।
महाराष्ट्र से मध्यप्रदेश में किया था प्रवेश
सामाजिक कार्यकर्ता प्रेम सुराणा ने बताया कि मुनि श्री 20 मई को महाराष्ट्र के शिरपुर से मध्यप्रदेश सीमा में प्रवेश कर बड़वानी जिले के गवाड़ी पहुंचे थे। इसके बाद वे सेंधवा के आगे गोई गांव पहुंचे, जहां रात्रि विश्राम किया।
अगले दिन 21 मई को उन्होंने लगभग 15 किलोमीटर का विहार किया। सेंधवा निवासी योगेश जैन और अशोक जैन ने उन्हें आहार कराया, जिसके बाद वे जुलवानिया की ओर रवाना हुए।
मिसकम्युनिकेशन के कारण आगे निकल गए मुनि श्री
जुलवानिया से उन्हें खरगोन जिले के सेगांव जाने का रास्ता बताया गया। इसी दौरान रात्रि विश्राम की व्यवस्था करने एक व्यक्ति स्थानक की सफाई के लिए चला गया। उसे लगा कि मुनि महाराज थोड़ी देर में वहां पहुंच जाएंगे, लेकिन सही जानकारी नहीं मिलने के कारण मुनि श्री आगे निकल गए और आगरा-मुंबई हाईवे पर लगातार चलते रहे।
ढाबे के पास बगीचे में बिताई रात
रात होने पर कोई सुरक्षित स्थान नहीं मिलने से मुनि महाराज ने एक ढाबे के पास बगीचे में ही विश्राम किया। अगले दिन सुबह वे फिर तपती धूप में बिना जल और आहार के विहार करते रहे।
पुलिस और समाज ने चलाया खोज अभियान
जब लंबे समय तक मुनि श्री का पता नहीं चला तो समाजजनों ने खोजबीन शुरू की। सूचना मिलने पर जुलवानिया थाना प्रभारी सौरव बाथम सक्रिय हुए। वहीं पुलिस अधीक्षक पद्मविलोचन शुक्ला ने भी तुरंत पुलिस टीमों को खोज अभियान में लगाया।
इधर बड़वानी से बावन गजा ट्रस्ट के मैनेजर इंद्रजीत मंडलोई और अंजड़ के धर्मेंद्र जैन भी समाजजनों के साथ तलाश में जुट गए। करीब 6 घंटे की लगातार खोज के बाद मुनि महाराज ठान फाटे के पास एक पुल के नीचे बैठे मिले।
मुनि श्री को देखकर भावुक हुए श्रावक
मुनि महाराज के सुरक्षित मिलने के बाद समाजजनों और पुलिसकर्मियों ने राहत की सांस ली। उन्हें तुरंत एक पेड़ की छांव में बैठाया गया। इसके बाद खरगोन जिले के उन और सेगांव से पहुंचे समाजजनों ने उनके आहार और जल की व्यवस्था की।
मुनि महाराज की हालत देखकर वहां मौजूद श्रावकों की आंखें भर आईं। कई लोग पश्चाताप और ग्लानि से भावुक हो गए। समाजजनों ने कहा कि इतने कष्ट सहने के बावजूद मुनि श्री के चेहरे का तेज तनिक भी कम नहीं हुआ।
समाज ने मानी बड़ी चूक
इंद्रजीत मंडलोई और धर्मेंद्र जैन ने बताया कि यह पूरी घटना मिसमैनेजमेंट और मिसकम्युनिकेशन का परिणाम है। यदि समय पर सही व्यवस्था और समन्वय होता तो मुनि महाराज को इतना कष्ट नहीं उठाना पड़ता।
अब हाईवे पर बनाई जाएगी विशेष व्यवस्था
इस घटना के बाद दिगंबर जैन कमेटी अब आगरा-मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग पर मुनि महाराजों के विहार, आहार चर्या और रात्रि विश्राम की बेहतर व्यवस्था बनाने की तैयारी में जुट गई है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।













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