चंद्रप्रभ जिनालय चंद्रपुरी बड़ के बालाजी में 21 से 30 मई तक धर्म संवर्धन संस्कृति शिविर आयोजित होगा। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी एवं संघ सान्निध्य में धार्मिक ग्रंथों और जैन संस्कारों की विशेष शिक्षा दी जाएगी। — पढ़िए जयपुर से राजेश जैन पंचोलिया की यह रिपोर्ट…..
जयपुर। चंद्रप्रभ जिनालय चंद्रपुरी बड़ के बालाजी में इस वर्ष ग्रीष्मकालीन धर्म संवर्धन संस्कृति शिविर का आयोजन 21 मई से 30 मई 2026 तक किया जा रहा है। शिविर को लेकर समाजजनों और बच्चों में विशेष उत्साह दिखाई दे रहा है।
आचार्य श्री संघ का पावन सान्निध्य
वात्सल्य वारिधि पंचम पट्टाधीश 108 आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज अपने 36 साधुओं के विशाल संघ सहित चंद्रप्रभ जिनालय परिसर में ग्रीष्मकालीन वाचना हेतु विराजित हैं। उनके सान्निध्य में प्रतिदिन दोपहर को प्रवचनसार भाषा टीका के तृतीय खंड का स्वाध्याय भी चल रहा है।
प्रायश्चित का महत्व बताया
स्वाध्याय के दौरान आचार्य श्री ने कहा कि साधु जीवन में शयन, चलने, उठने-बैठने जैसी बाहरी क्रियाओं में हुए अतिचारों का प्रायश्चित आचार्य एवं दीक्षा गुरु से लिया जाता है। प्रायश्चित लेने से भावों के विकार दूर होते हैं और आत्मा निर्मल बनती है।
राजेश पंचोलिया, सुरेश सबलावत एवं भागचंद चूड़ीवाल ने बताया कि आचार्य श्री ने साधु जीवन की सरलता को समझाते हुए कहा कि जैसे एक बालक अपने माता-पिता से बिना कपट अपनी गलती स्वीकार करता है, उसी प्रकार साधु भी निष्कपट भाव से अपने दोषों का प्रायश्चित लेते हैं।
बच्चों को मिलेगा धर्म और संस्कारों का ज्ञान
मंदिर समिति की श्रीमती सुनीता भागचंद चूड़ीवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि शिविर में बच्चों, युवाओं और श्रद्धालुओं को जैन धर्म एवं संस्कृति की विशेष शिक्षा दी जाएगी।
शिविर में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी, मुनि श्री हितेंद्र सागर जी, प्रभवसागर जी, चिंतनसागर जी तथा आर्यिका श्री महायशमति माताजी, पद्मयशमति माताजी एवं दिव्ययशमति माताजी के सान्निध्य में विभिन्न धार्मिक विषयों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इन विषयों पर होगा शिक्षण
शिविर में छहढ़ाला, धार्मिक संस्कार प्रथम एवं द्वितीय भाग, तत्वार्थ सूत्र, भक्तामर स्तोत्र, द्रव्य संग्रह सहित कई महत्वपूर्ण धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन कराया जाएगा। आयोजकों का कहना है कि शिविर का उद्देश्य नई पीढ़ी को धर्म, संस्कार और संस्कृति से जोड़ना है।













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