जैन संस्कृत विद्यालय के विद्वान प्रिंस जैन शास्त्री ‘देवांश’ ने चातुर्मास के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संतों का चातुर्मास किसी नगर के लिए सौभाग्य और आत्मकल्याण का महाअवसर होता है। पढ़िए श्रीफल साथी मनोज जैन नायक की यह रिपोर्ट।
मुरैना। जैन संस्कृत विद्यालय के विद्वान प्रिंस जैन शास्त्री ‘देवांश’ ने कहा कि दिगंबर जैन परंपरा में चातुर्मास केवल चार माह का धार्मिक प्रवास नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम, तप, साधना और धर्मप्रभावना का महापर्व है। संतों का सान्निध्य किसी भी नगर के लिए पुण्योदय का प्रतीक होता है और उनके प्रवचनों से समाज में संस्कार, सदाचार एवं आध्यात्मिक चेतना का संचार होता है।
चातुर्मास का आध्यात्मिक महत्व
प्रिंस देवांश ने कहा कि चातुर्मास के दौरान मुनिराज एवं आर्यिका माताजी एक स्थान पर विराजमान होकर धर्मोपदेश, स्वाध्याय और साधना के माध्यम से समाज को आत्मकल्याण एवं मोक्षमार्ग की प्रेरणा देते हैं। उनके सान्निध्य से असंख्य लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है।
संस्कार निर्माण का सशक्त माध्यम
उन्होंने बताया कि चातुर्मास केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के चरित्र निर्माण का भी आधार है। इस अवधि में जप, तप, व्रत, दान, सामायिक, प्रतिक्रमण, उपवास एवं धर्मचर्चा जैसे आध्यात्मिक कार्यों का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
युवाओं को मिलती है नई दिशा
प्रिंस देवांश ने कहा कि वर्तमान समय में नई पीढ़ी भौतिकता और आधुनिक जीवनशैली के कारण धर्म एवं संस्कारों से दूर होती जा रही है। ऐसे समय में संतों का चातुर्मास युवाओं को संयम, सदाचार, अहिंसा, आत्मानुशासन और जैन संस्कृति से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बनता है।
संतों का आगमन नगर का सौभाग्य
उन्होंने कहा कि किसी समाज के लिए संतों का चातुर्मास उसकी सबसे बड़ी आध्यात्मिक उपलब्धि है। जहां संतों का प्रवास होता है, वहां धर्म की गंगा प्रवाहित होती है, संस्कारों का विकास होता है और समाज में संगठन, सेवा, सद्भाव तथा धार्मिक चेतना का वातावरण निर्मित होता है।
समाज से किया आह्वान
प्रिंस देवांश ने समाज के पदाधिकारियों एवं धर्मानुरागियों से आग्रह किया कि वे संतों के चातुर्मास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करें। उन्होंने कहा कि यह केवल चार माह का आयोजन नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के धार्मिक, सांस्कृतिक और नैतिक निर्माण का सशक्त आधार है।













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