विश्व जैन संगठन की दिल्ली-गिरनार धर्मयात्रा का मुरैना में जैन समाज ने भव्य स्वागत किया। शोभायात्रा, धर्मसभा और गिरनार तीर्थ संरक्षण के संदेश के साथ श्रद्धालुओं ने 20 जुलाई को भगवान नेमिनाथ के निर्वाण कल्याणक पर अधिकाधिक संख्या में गिरनार पहुंचने का आह्वान किया। पढ़िए श्रीफल साथी मनोज जैन नायक की यह रिपोर्ट।
मुरैना। विश्व जैन संगठन द्वारा आयोजित दिल्ली-गिरनार धर्मयात्रा का नगर आगमन पर मुरैना में श्रद्धा, उत्साह एवं भक्ति के साथ भव्य स्वागत किया गया। श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर कमेटी के तत्वावधान तथा जैन मित्र मंडल के सहयोग से विशाल शोभायात्रा एवं धर्मसभा का आयोजन हुआ। नगरभर में श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा, आरती एवं श्रीफल अर्पित कर धर्मयात्रा का अभिनंदन किया।
दिल्ली से प्रारंभ हुई धर्मयात्रा
मीडिया प्रभारी मनोज जैन नायक ने बताया कि धर्मयात्रा का शुभारंभ 25 जून को दिल्ली से पूज्य जैनाचार्य विमर्श सागर जी महाराज के आशीर्वाद से हुआ था। लगभग 25 दिवसीय यह यात्रा विभिन्न राज्यों से होते हुए करीब 5000 किलोमीटर का सफर तय कर 20 जुलाई को भगवान नेमिनाथ की निर्वाण स्थली गिरनार पहुंचेगी, जहां निर्वाण कल्याणक पर निर्वाण लाडू अर्पित किया जाएगा।
जैन मित्र मंडल ने संभाली व्यवस्थाएं
मुख्य संयोजक सतेंद्र जैन के नेतृत्व में जैन मित्र मंडल, बड़ा मंदिर कमेटी, जिनेंद्र सेवा समूह, महिला मंडलों, बालिका मंडलों एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों ने धर्मयात्रा की भव्य अगवानी की। यात्रा प्रारंभ होने से पूर्व आयोजकों ने ज्ञानतीर्थ जिनालय पहुंचकर बड़े बाबा एवं आचार्य ज्ञानसागर जी महाराज के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
गिरनार रथ और झांकी बने आकर्षण का केंद्र
नगर भ्रमण के दौरान भगवान नेमिनाथ की मोक्ष स्थली गिरनार पर्वत की भव्य झांकी एवं सुसज्जित रथ श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहे। श्रद्धालु स्थान-स्थान पर आरती कर श्रीफल अर्पित करते रहे। शोभायात्रा में जैन भजन, जयघोष, पचरंगी जैन ध्वज एवं राष्ट्रीय तिरंगे के साथ युवाओं, महिलाओं और बच्चों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
धर्मसभा में तीर्थ रक्षा का आह्वान
बड़े जैन मंदिर में आयोजित धर्मसभा में विश्व जैन संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय जैन, चंचल जैन, राजेंद्र भंडारी, अनिल जैन, ओमप्रकाश जैन सहित वक्ताओं ने समाजजनों से 20 जुलाई को गिरनार पहुंचकर भगवान नेमिनाथ के निर्वाण कल्याणक महोत्सव में सहभागी बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि तीर्थों की रक्षा, संरक्षण एवं धर्म प्रभावना प्रत्येक श्रद्धालु का दायित्व है।
तीर्थ संरक्षण को बताया महान पुण्य
वक्ताओं ने कहा कि भारतीय संस्कृति एवं जैन परंपरा में तीर्थों की रक्षा, उनका संरक्षण, जीर्णोद्धार एवं पवित्रता बनाए रखना अत्यंत पुण्यदायी कार्य है। तीर्थ संरक्षण से धर्म प्रभावना के साथ आत्मकल्याण और मोक्ष मार्ग भी प्रशस्त होता है।













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