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भोजन में शुद्धता का जैनाचार – सीए आदीश कु जैन

आज कोरोना के चलते खान पान और शुद्धता की चर्चा जोरों पर है। अच्छे स्वास्थ और बीमारियों से बचने के लिए वनस्पति आधारित और शाकाहारी भोजन का महत्व सारा विश्व समझ...

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बेहतर कल के लिए पर्यावरण संरक्षण जरूरी : डॉ सुनील जैन संचय, ललितपुर

पर्यावरण दिवस 5 जून 2021 पर विशेष : प्राणवायु ही नहीं जीवन के आधार हैं वृक्ष पर्यावरण शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है – ‘परि’ + ‘आवरण’। ‘परि’ का अर्थ है- चारों...

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परिस्थिति कुछ भी हो मनःस्थिति को संतुलित रखिए – डॉ. सुनील जैन संचय, ललितपुर

मानवीय संवेदनाओं को संक्रमित होने से बचाएं  हम सभी अवगत हैं, इन दिनों  कोविड के संकट के दौर से पूरा विश्व  गुजर रहा है।भारत पर कोरोना का कहर वज्रपात की तरह...

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अक्षय तृतीया : अक्षय तृतीया से शुरू हुयी थी जैन परम्परा में दान की शुरूवात – डॉ. सुनील जैन ‘संचय’, ललितपुर

भारतीय संस्कृति में पर्व, त्याहारों और व्रतों का अपना एक अलग महत्व है। ये हमें हमारी सांस्कृतिक परंपरा से जहां जोड़ते हैं वहीं हमारे आत्मकल्याण में भी कार्यकारी...

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मदर्स डे : पीड़ाओं को सहकर आंचल की छाया देती है माँ – डॉ. सुनील जैन संचय ललितपुर

माँ ही है, जो हमे दुनिया से नौ महीनों ज्यादा जानती है | मां के लिए कोई भी शब्द, लेख या उपाधि कम होगी। उनके प्यार और समर्पण को जिंदगी लगाकर भी जताया नहीं जा...

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तीर्थंकर महावीर और उनके द्वारा उपदेशित अहिंसा – डाॅ. महेन्द्रकुमार जैन ‘मनुज’, इन्दौर

तीर्थंकर महावीर का उदय ऐसे समय में हुआ, जहाँ मानव क्रूर हिंसा की क्रिया में लिप्त था। हिंसा का बोलबाला था। आज भी जहाँ यह स्थिति परिलक्षित हो रही है इसे पाटने...

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मंथन: समाज को दिशा और प्रेरणा देते हैं जयंती पर्व- प्रियंका सेठी,किशनगढ़

बंधुओं…इस माह हम जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ और अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर की जयंती मनाने जा रहे हैं। आज से हजारों-लाखों वर्ष पूर्व इन तीर्थंकरों...

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मंथन: भगवान महावीर

प्रस्तुति : तुष्टि जैनM.com DEl.Ed बालक महावीर का जन्म कहाँ हुआ था ?उत्तर – बालक महावीर का जन्म कुण्डग्राम (वैशाली) विहार में हुआ था। तीर्थंकर महावीर के...

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मंथन: भगवान आदिनाथ

प्रस्तुति : तृष्टि जैनM.com, D.El.Ed.} भगवान आदिनाथ के कुछ प्रचलित नाम बताइये।उत्तर – (1) श्री आदिनाथ जी, (2) श्री ऋषभनाथ जी, (3) श्री वृषभनाथ जी, (4)...

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मंथन: अंहिसा के प्रणेता वर्धमान महावीर

वर्तमान काल में जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ़़ऋषभदेव से आरम्भ हो कर 24 तीर्थंकरों की यह परम्परा भगवान महावीर पर आकर समाप्त होती है। भगवान महावीर का जन्म...

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