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मुनि श्री अपूर्व सागर जी एवं मुनि श्री अर्पितसागर जी महाराज ने किया सम्मानित : भरत जैन दान चिंतामणि रत्न की उपाधि से अलंकृत 

इंदौर। परम पूज्य वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री अपूर्व सागर जी एवं मुनि श्री अर्पितसागर जी महाराज को श्री सिद्ध क्षेत्र मांगीतुंगी से राजस्थान की ओर विहार कराने वाले एवं शिक्षा व चिकित्सा में भी मुक्त हस्त से दान करने वाले संघपति, निमाड़ गौरव, जीरभार रत्न भरत जैन (जीरभार वाले ) इंदौर को सिद्ध क्षेत्र बावनगजा में आयोजित धर्म सभा में मुनि द्वय ने दान चिंतामणि रत्न की उपाधि से अलंकृत किया है। इस मौके पर निमाड़, मालवा के बहुत से श्रद्धालु मौजूद रहे।

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Shreephal Jain News

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