कालानीनगर में गुप्तिसदन चैत्यालय में सोमवार को पंचमेरु स्थापना में श्रद्धा, आस्था और भक्ति का अपूर्व दृश्य उपस्थित हुआ। सभी महिला-पुरुष सौभाग्यशाली श्रद्धालुओं ने पंडित नितिन झांझरी के सानिध्य में पंचमेरु स्थापन किया। इंदौर से पढ़िए, रेखा संजय जैन की यह खास रिपोर्ट…
इंदौर। कालानीनगर में गुप्तिसदन चैत्यालय में सोमवार को पंचमेरु स्थापना में श्रद्धा, आस्था और भक्ति का अपूर्व दृश्य उपस्थित हुआ। सभी महिला-पुरुष सौभाग्यशाली श्रद्धालुओं ने पंडित नितिन झांझरी के सानिध्य में पंचमेरु स्थापन किया। संगीता विनय छाबडा ने श्री 1008 आदिनाथ गुप्ति सदन मंदिर जी में पंचमेरू की स्थापना की। उनके इस पुण्यार्जन की सब ने अनुमोदना की। समापन दिवस पर मानव सेवार्थ दंत एवं नेत्र शिविर लगाया गया। इसमें निःशुल्क जांच की गई और उपचार परामर्श दिया। इससे पूर्व गुप्तिसदन चैत्यालय में भगवान का अभिषेक, शांतिधारा विधि-विधान से पंडित नितिन झांझरी ने मंत्रों का उच्चारण कर करवाई। भगवान का अभिषेक, पूजन और विधिविधान से शांतिधारा सहित नित्यमह पूजन के बाद पंचमेरु स्थापन किया गया। पंडित नितिन जी ने पंचमेरु स्थापना का धार्मिक महत्व बताया।

पंचमेरु स्थापन और विधान
पंडित नितिन झांझरी ने बताया कि एक अत्यंत पुण्यशाली और महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। इस विधान में मध्यलोक के ढाई द्वीप (मनुष्य लोक) में स्थित पांच शाश्वत मेरु पर्वतों—सुदर्शन, विजय, अचल, मंदर और विद्युन्माली की मानसिक और द्रव्य रूप में स्थापना कर उनमें स्थित 80 शाश्वत अकृत्रिम जिनालयों की आराधना की जाती है।

इस प्रकार होती है पंचमेरु स्थापना
धातु या पाषाण के मेरु: श्रावक अपनी सामर्थ्य के अनुसार सोने, चांदी, तांबे या पाषाण से बने सुंदर पंचमेरु की स्थापना वेदी पर करते हैं। यदि भौतिक मेरु न हों तो शुद्ध किए गए पांच रंगों के चूर्ण (अबीर) या रंगे हुए चावलों से जमीन या पटे पर बहुत ही सुंदर पंचमेरु मंडल चित्रित किया जाता है। मंडल को तोरण, ध्वज, छत्र, चामर, मंगल कलश और केले के खंभों से भव्य रूप से सजाया जाता है। इस सजे हुए मंडल के ठीक बीच में सिंहासन पर तीर्थंकर भगवान (जिनेन्द्र देव) की प्रतिमा विराजमान की जाती है। मंदिर में शास्त्र, पिच्छी, उपकरण, औषधि और आहार का दान दिया जाता है ताकि महान पुण्य अर्जित हो सके।
बजुर्गों का चरण वंदन कर किया बहुमान
कार्यक्रम संयोजक ऊषा प्रकाश पाटनी ने बताया कि रविवार शाम को गुप्तिसदन में ऐसे बजुर्गों का सम्मान किया गया। जो तीन पीढ़ियों से संयुक्त परिवार में रह रहे हैं। यह भावपूर्ण कार्यक्रम में उनका बहुमान किया गया। साथ ही इस कर दिवसीय चतुर्थ वार्षिकोत्सव में सहभागियों और सहयोगियों का भी सकल दिगंबर जैन कालानीनगर मंदिर समिति की ओर से बहुमान किया गया। उन्होंने बताया कि यह सभी कार्यक्रम ब्रह्मचारी बहन रंजना दीदी के मार्गदर्शन में संपन्न हुए।
मानव की सेवा से आत्मा का सीधा संबंध- शिविर सार्थक
सोमवार को श्री आदिनाथ दिगंबर जैन गुप्ति सदन चैत्यालय में वार्षिकोत्सव के तहत समापन दिवस और उपाध्याय श्री गुप्तिसागर जी महाराज की शिष्या ब्रह्मचारी बहन सुमन दीदी की पुण्यतिथि पर निशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण शिविर लगाया गया। इसमें विभिन्न जांचों के अलावा दंत और नेत्र संबंधित रोगों का तत्काल निदान किया गया। सर्जरी योग्य मरीजों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया। दंत चिकित्सक डॉ. प्रतिभा परदेसी ने यहां पर सेवाएं प्रदान की और मरीजों की जांच की और उनकी समस्याओं का समाधान किया।शुभम नायक और अभिषेक दुबे ने बताया कि शिविर रोशनी आई क्लिनिक एवं सर्जरी सेंटर राजस हॉस्पिटल तथा शुभ आई केयर कालानीनगर के सहयोग से किया गया।













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