नौगामा स्थित सुखोदय तीर्थ नसिया जी में अष्टानिका महापर्व के छठे दिन सिद्धचक्र विधान एवं नंदीश्वर दीप विधान श्रद्धापूर्वक सम्पन्न हुआ। 256 महाअर्घ्य समर्पित किए गए तथा जैन पाठशाला के बच्चों ने सामूहिक पूजन कर धर्मलाभ अर्जित किया। पढ़िए श्रीफल साथी सुरेश चंद्र गांधी की यह रिपोर्ट।
नौगामा (जिला बांसवाड़ा, राजस्थान)। अष्टानिका महापर्व के छठे दिन श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर एवं श्री 1008 भगवान महावीर समवशरण मंदिर, सुखोदय तीर्थ नसिया जी में विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन श्रद्धा एवं भक्ति के साथ सम्पन्न हुआ। प्रातः विशेष अभिषेक एवं शांतिधारा के पश्चात नंदीश्वर दीप विधान एवं सिद्धचक्र विधान में श्रद्धालुओं ने 256 महाअर्घ्य समर्पित किए।
भक्तिमय वातावरण में सम्पन्न हुआ विधान
वाद्ययंत्रों की मधुर स्वर लहरियों एवं मंगलमय वातावरण के बीच श्रद्धालुओं ने सिद्धचक्र विधान एवं नंदीश्वर दीप विधान में उत्साहपूर्वक सहभागिता की। पूरे मंदिर परिसर में भक्ति एवं आध्यात्मिकता का वातावरण बना रहा।
अष्टानिका महापर्व का बताया महत्व
इस अवसर पर वीणा दीदी एवं दृष्टि दीदी ने अष्टानिका महापर्व की महिमा का वर्णन करते हुए बताया कि श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान का संबंध श्रीपाल एवं मैना सुंदरी की प्रेरणादायी कथा से है। उन्होंने कहा कि यह विधान आत्मशुद्धि, पुण्यार्जन तथा विश्व शांति की मंगलकामना का महत्वपूर्ण माध्यम है।
चातुर्मास और अहिंसा का संदेश
प्रवचन में बताया गया कि अष्टानिका महापर्व के साथ ही चातुर्मास का शुभारंभ होता है। वर्षा ऋतु में सूक्ष्म जीवों की रक्षा एवं अहिंसा के पालन के लिए दिगंबर साधु-संत चार माह तक एक ही स्थान पर विराजमान रहकर स्वाध्याय, साधना एवं धर्म प्रभावना करते हैं।
जैन पाठशाला के बच्चों ने की सामूहिक पूजन
रविवार को आयोजित जैन पाठशाला में मनीषा नानावटी के सान्निध्य में बच्चों ने सामूहिक रूप से पूजन कर धर्मलाभ अर्जित किया। कार्यक्रम के अंत में बच्चों को अल्पाहार एवं पुरस्कार प्रदान कर प्रोत्साहित किया गया।
समाज ने किया धर्मलाभ
अष्टानिका महापर्व के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर विधान, पूजन एवं धार्मिक गतिविधियों में भाग लिया तथा विश्व शांति, सुख-समृद्धि और आत्मकल्याण की मंगलकामना की।













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