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मेरठ से जुड़ा एक और स्वर्णिम इतिहास : राजधानी दिल्ली के प्रतिष्ठित जैन परिवार की बच्ची ने किया विमर्श गुरुकुलम् में आत्म समर्पण


आचार्य श्री विमर्श सागर जी के विशाल चतुर्विध संघ में एक और वैरागी आत्मा ने आत्म समर्पण किया। राजधानी दिल्ली के कृष्णानगर में निवास करने वाले एक प्रतिष्ठित परिवार में बड़े ही नाजों से पली-बढ़ी अविका जैन आचार्य संघ से जुड़ीं। मेरठ से पढ़िए, सोनल जैन की यह रिपोर्ट…


मेरठ। आचार्य श्री विमर्श सागर जी के विशाल चतुर्विध संघ में एक और वैरागी आत्मा ने आत्म समर्पण किया। राजधानी दिल्ली के कृष्णानगर में निवास करने वाले एक प्रतिष्ठित परिवार में बड़े ही नाजों से पली-बढ़ी अविका जैन जिन‌का जन्म दादा नथमलदास, वीरेन्द्र जैन की पौत्री एवं पिता आशु जैन-माता निधि जैन की पुत्री के रूप में 19 जुलाई 2004 को हुआ था। धार्मिक संस्कारों के साथ अविका जैन ने अपनी लौकिक शिक्षा बीएससी केमेस्ट्री विषय के साथ पूर्ण की। राजधानी दिल्ली में वर्ष 2015 का चातुर्मास भव्यात्माओं के लिए एक स्वर्णिम अवसर बनकर आया। आज से पहले आचार्य प्रवर के संघ में राजधानी से ही तीन वैरागी भव्य जीवों ने घर-परिवार का मोह त्यागकर वैराग्य पंथ अंगीकार कर गुरु चरणों में आत्म समर्पण किया था।

मोक्षमार्ग की मार्गदर्शिका बनेगी

रविवार को श्री 1008 समवसरण महामंडल विधान के समापन अवसर पर राजधानी दिल्ली से अविका जैन को उनके पूरे कुटुम्ब ने उत्साह-उल्लास के साथ आचार्य श्री के चरणों गुरु संघ में समर्पित किया। इस वैरागी बहन के परिवारी जनों ने अपनी भावना रखते हुए कहा- हमारे परिवार का बड़ा ही सौभाग्य है, जो हमारे परिवार में एक ऐसी संतान ने जन्म लिया, जो गुरु संघ में समर्पित होकर आत्म कल्याण करेगी, साथ ही हम सभी के लिए भी मोक्षमार्ग की मार्गदर्शिका बनेगी। बहन के दादाजी ने कहा-हम सब संसारी प्राणी हैं, मोह से ग्रसित रहते हैं, हम सबने बिटिया को रोकने का 2 साल तक बहुत प्रयास किया किन्तु इसकी श्रद्धा और भक्ति ने हम सबको झुकने के लिए मजबूर कर दिया। बेटी के वैराग्य को देखकर हमारा पूरा परिवार ही अपने परिवार के एक पुष्प को गुरु चरणों में समर्पित करने आए हैं।

समवसरण महामंडल विधान संपन्न

महानगर मेरठ में प्रथम बार पधारे विशाल चतुर्विध संघ के सानिध्य में हुआ। श्री 1008 समवसरण महामंडल विधान रविवार को पूर्ण हुआ। महा-अनुष्ठान के आयोजक मेरठ जैन समाज के अध्यक्ष सुरेश जैन, ऋतुराज ने आत्म भावना व्यक्त करते हुए कहा -सच कहूँ – सर्वप्रथम तो वृहद् संघ को देखकर ही मन घबरा रहा था किन्तु आचार्य श्री और ससंघ की सरलता और वात्सल्य देखकर मैं क्या छोटी से छोटी समाज भी आचार्य श्री ससंघ को ले जाने के लिए तैयार हो जाते हैं। रविवार को आचार्य संघ (35 पिच्छी) शारदा रोड जैन मंदिर से पद‌विहार करते हुए मेरठ के आनंदपुरी जैन मंदिर में पहुंचे।

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