आचार्य श्री विभव सागर जी महाराज की शिष्या सिद्ध मति माताजी संघ सहित नगर में विराजमान हैं। प्रातः माताजी के सानिध्य में वागड़ के बड़े बाबा आदिनाथ भगवान नेमिनाथ भगवान की शांतिधारा उनके मुखारबिंद से की गई। नौगामा से पढ़िए, सुरेशचंद्र गांधी की यह रिपोर्ट…
नौगामा। आचार्य श्री विभव सागर जी महाराज की शिष्या सिद्ध मति माताजी संघ सहित नगर में विराजमान हैं। प्रातः माताजी के सानिध्य में वागड़ के बड़े बाबा आदिनाथ भगवान नेमिनाथ भगवान की शांतिधारा उनके मुखारबिंद से की गई। इस अवसर पर माताजी द्वारा ईस्टोपदेश ग्रंथ का वाचन चल रहा है। शाम को आचार्य भक्ति के बाद दीदी का मंगल प्रवचन हुआ।माताजी ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि मनुष्य को हमेशा अच्छे कर्म करने चाहिए। अच्छे कर्म करने से अगले भव में अच्छी गति मिलेगी और मोक्ष मार्ग की ओर की ओर यह यह जीव बढ़ेगा परंतु, बुरे कर्म करने पर हमें नीच गति बंद होगा। प्रत्येक मनुष्य को मनुष्य भव बड़ी मुश्किल से मिला है। 84 लाख योनियों में भटकने के बाद अच्छे कर्म किए हैं तो तभी तो मनुष्य गति मिली। वह भी बहुत कम उम्र के जीव को अपने परिणामों के अनुसार फल मिलता है। शुभ कर्म करे तो शुभ अशुभ कर्म करे तो अशुभ। शुद्ध कम करें तो शुद्ध भाव रूप जीवको फल मिलता है।
इसलिए प्रति समय अपने परिणामों को संभाल कर रखें। परिणाम की विचित्रता है इसलिए परिणाम संभाल कर ही रखना चाहिए। परिणाम से ही मोक्ष है और परिणाम से ही बंद है। सो परिणाम सुधारने का अभ्यास करना, इसलिए हमें अच्छे कर्म करने चाहिए। इस अवसर पर जैन पाठशाला के छात्रों को नियमित आने के लिए आह्वान किया एवं सभी अभिभावक को से निवेदन किया गया कि प्रत्येक घर से अपने पुत्र-पुत्रियों को जैन पाठशाला में जरूर भेजना है।













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