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सनावद में हुआ त्रय मुनिराजों का मंगल प्रवेश : अगवानी और श्री जी के दर्शन के बाद धर्मसभा का हुआ आयोजन 


सनावद में रविवार को त्रय मुनिराजों मंगल प्रवेश बासवा से हुआ। आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री प्रणय सागर जी महाराज, मुनि श्री सर्वार्थ सागरजी महाराज एवं मुनिश्री सौम्य सागर जी महाराज ससंघ का मंगल प्रवेश सुबह हुआ। मुनिराजों की अगवानी अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्यसागर जी महाराज सहित सभी समाजजनों ने की। धर्मसभा में देशना हुई। सनावद से पढ़िए सन्मति जैन काका की यह खबर…


सनावद। अनेक त्यागियों की नगरी सनावद में रविवार को त्रय मुनिराजों मंगल प्रवेश बासवा से हुआ। आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री प्रणय सागर जी महाराज, मुनि श्री सर्वार्थ सागरजी महाराज एवं मुनिश्री सौम्य सागर जी महाराज ससंघ का मंगल प्रवेश रविवार को प्रातः 7 बजे बासवा की ओर से हुआ। मुनिराजों की अगवानी नगर में विराजित अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्यसागर जी महाराज सहित सभी समाजजनों ने खंडवा रोड से की। इसके बाद त्रय मुनिराजों ने नगर में जैन मंदिरों के दर्शन किए। इसके बाद बड़े मंदिर के सामने स्थित आचार्य शांति सागर वर्धमान देशना संत निलय में सभा की। शुरुआत भगवान महावीर स्वामी के चित्र के समकक्ष दीप प्रज्वलन से हुई।

दीप प्रज्वलन मुनिश्री प्रणय सागर जी महाराज को विहार कर रहे संघपति सारंगकुमार जैन, सारिका जैन एवं पंढरपुर से पधारी दीदियों ने किया। मंगलाचरण नरेंद्र भारती ने किया। अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्य सागर जी महाराज कहा कि जब दो परिवार आपस में मिलते हैं तो निश्चित रूप से जो सुख की अनुभति होती है। उत्साह होता है। आज हमें भी इस प्रकार के अनुभूति हुई है कि दो संघों के साधुओं का आपस में उठना-बैठना इस बात का परिचालक है कि एक संयमी के प्रति एक संयमी का कैसे आदर सम्मान विनय का भाव होना चाहिए।

कामयाबी पाना है तो उसका मूलमंत्र है माइंड सेट: अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्य सागरजी महाराज 

हमें निश्चित रूप से एक-दूसरे की वैयावृती करना और वैयावृती के साथ विनय का भाव रखना, यही साधु के पास आदान और प्रदान का कारण बनता है। जीवन हमारे लिए कितना अमूल्य है। आप लोगों के लिए भी समय अमूल्य है क्योंकि, आगे आठ दिनों तक आप के नगर में साधुओं का समागम मिलने वाला है। आप साधुओं की सेवा वैयावृती आहार करवाकर आप पुण्य का संचय कीजिएगा। इसी क्रम में मुनिश्री प्रणय सागरजी महाराज ने कहा कि हमें इस विश्व में इस जीवन में यदि कामयाबी पाना है तो उसका एक मूलमंत्र है माइंड सेट।

यदि हमंे मोक्ष पाना है तो भी हमंे माइंड सेट करना पड़ेगा। जीवन में लखपति-करोड़पति भी बनना है, जीवन में किसी भी क्षण पर कहीं भी कामयाबी पाना होता है उसका मूल मंत्र है माइंड सेट। यदि माइंड सेट नहीं है तो आप कभी भी कामयाब नहीं हो सकते है। इसी क्रम में रात्रि में मुनिश्री द्वारा आनंद यात्रा, गुरु भक्ति और भक्तों द्वारा आरती की गई।

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