श्री पार्श्वनाथ बड़ा मंदिर श्री सहित अनेक मंदिरों, चैत्यालय से सुशोभित जोबनेर प्राचीन समय से भट्टारक स्वामियों की कर्म तप स्थली रही हैं। साधुओं की जन्म कर्म भूमि जोबनेर में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 36 साधुओं सहित अल्प काल के लिए विराजित हैं। जोबनेर जयपुर से पढ़िए, डॉ.राजेश पंचोलिया की यह रिपोर्ट…
जोबनेर जयपुर। श्री पार्श्वनाथ बड़ा मंदिर श्री सहित अनेक मंदिरों, चैत्यालय से सुशोभित जोबनेर प्राचीन समय से भट्टारक स्वामियों की कर्म तप स्थली रही हैं। साधुओं की जन्म कर्म भूमि जोबनेर में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 36 साधुओं सहित अल्प काल के लिए विराजित हैं। श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर जोबनेर में रत्न्यत्रय रूपी तीन नवीन वेदियों का शिलान्यास विभिन्न पुण्यार्जक परिवारों द्वारा बुधवार को आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ में सानिध्य में हुआ। आचार्य श्री के आशीर्वाद से स्पर्शित स्वर्ण, रजत, ताम्र,अष्ट धातु, पीतल, सहित शिलाएं चयनित परिवारों ने विधि विधान मंत्रोच्चार पूर्वक विराजित कीं।
मंदिर वेदी का जीर्णाेद्धार जन्मदाता पुण्य का कार्य
प्रातः काल श्री जी का अभिषेक हुआ। इस अवसर पर मुनि श्री प्रभव सागर जी, मुनि श्री हितेन्द्र सागर जी के प्रवचन के बाद आचार्य श्री ने मंगल देशना में बताया कि जिनालय जीर्णाेद्धार वेदी का जीर्णाेद्धार काल के प्रभाव से पुण्य उदय आने पर होता है। मंदिर वेदी का जीर्णाेद्धार जन्मदाता पुण्य का कार्य होता है। आप सभी शिलान्यास कार्यक्रम में भक्ति और उत्साह से भाग ले रहे हैं। इससे पुण्य में वृद्धि होती है। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने नूतन वेेदी निर्माण शिलान्यास के अवसर पर श्री पार्श्वनाथ जिनालय में प्रकट की।
आहार लेने वाला अर्थात श्रावक से साधु हो जाता है
आचार्य श्री ने आगे बताया कि इसी नगर के पांच प्राणी वैराग्य दीक्षा लेकर आप सबके लिए प्रेरणादायी बने हैं। उन्होंने प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी की परंपरा पूर्वाचार्यों की सेवा वैयावृति भक्ति कर पुण्य का संपादन किया है। आहार देते-देते श्रावक-श्राविका भी पुण्य से आहार लेने वाला अर्थात श्रावक से साधु हो जाता है। आज भैया ने शुद्ध जल ग्रहण करने का नियम लेकर आहार देने की पात्रता हासिल की है। वह भी एक दिन आहार लेने वाले बने ऐसा हमारा आशीर्वाद है।
जिनालय मैं भगवान बोलते नहीं, श्रावक सुनते नहीं
आचार्यश्री ने कहा कि भगवान की नवीन वेदी का काम होगा। जिनालय भगवान की भक्ति के लिए होते हैं। जिनालय मैं भगवान बोलते नहीं है और आप श्रावक लोग सुनते नहीं है। जिन्होंने भगवान को बोलते हुए देखा, उन्हें सुना है। वह वैराग्य पूर्वक संयम धारण करते हैं। दोपहर को श्री कैलाश चूड़ीवाल, उषा चूड़ीवाल के णमोकार मंत्र के 35 उपवास के उपलक्ष्य में गुरुवार को पारणा हो रहा है। आचार्य संघ सान्निध्य में णमोकार महा मंडल विधान का पूजा हुई।













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