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22 जून को फुलेरा में आचार्य श्री का मंगल प्रवेश : 36 साधुओं के साथ होगा ऐतिहासिक आगमन


वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज 36 साधु-साध्वी संघ सहित 22 जून को फुलेरा में मंगल प्रवेश करेंगे। पंचकल्याणक प्रतिष्ठा की हीरक जयंती एवं आचार्य श्री धर्मसागर जी की छतरी के शिलान्यास को लेकर नगर में उत्साह का वातावरण है। रिपोर्ट: डॉ. राजेश पंचोलिया


फुलेरा! वात्सल्य वारिधि पंचम पट्टाधीश 108 आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज 36 साधु-साध्वी संघ के साथ 22 जून को फुलेरा नगर में भव्य मंगल प्रवेश करेंगे। उनका आगमन दो दिवसीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा की हीरक जयंती एवं आचार्य श्री धर्मसागर जी महाराज की छतरी के शिलान्यास समारोह के लिए हो रहा है।

डॉ. राजेश पंचोलिया, श्री निलेश बड़जात्या एवं श्री कमोद छाबड़ा ने बताया कि प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का यह आगमन फुलेरा के लिए ऐतिहासिक अवसर है।

21 जून को यहां रहेगा रात्रि विश्राम

21 जून को सायं लगभग 5 बजे मंगल विहार करते हुए आचार्य श्री का संघ शरण फार्म हाउस पहुंचेगा, जबकि आर्यिका संघ का रात्रि विश्राम राम रेस्टोरेंट के पास निर्माणाधीन भवन में होगा। इसके बाद 22 जून को फुलेरा नगर में भव्य मंगल प्रवेश होगा।

37 पीछियों के साथ पहुंचेगा विशाल संघ

मंगल प्रवेश में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के साथ मुनि श्री हितेंद्रसागर, मुनि श्री प्रभवसागर, मुनि श्री चिंतनसागर, मुनि श्री दर्शितसागर, मुनि श्री प्रबुद्धसागर, मुनि श्री मुमुक्षुसागर, मुनि श्री प्रणीतसागर, मुनि श्री ध्येयसागर, मुनि श्री भुवनसागर एवं मुनि श्री गुणोदयसागर शामिल रहेंगे।

आर्यिका संघ में आर्यिका श्री शुभमति, श्री चैत्यमति, श्री विलोकमति, श्री दिव्यांशुमति, श्री पूर्णिमामति, श्री मुदितमति, श्री विचक्षणमति, श्री समर्पितमति, श्री निर्मुक्तमति, श्री विनम्रमति, श्री दर्शनामति, श्री देशनामति, श्री महायशमति, श्री देवर्धिमति, श्री प्रणतमति, श्री निर्मोहमति, श्री पद्मयशमति, श्री दिव्ययशमति, श्री प्रेक्षामति एवं श्री जिनेशमति माताजी शामिल रहेंगी।

इसके अलावा ऐलक श्री हर्षसागर, क्षुल्लक श्री प्राप्तिसागर, क्षुल्लक श्री सुभगसागर, क्षुल्लक श्री सुगुप्तसागर, क्षुल्लक श्री प्रतिज्ञासागर तथा क्षुल्लिका श्री प्रदीप्तमति जी भी संघ के साथ रहेंगे। इस प्रकार 1 आचार्य, 10 मुनिराज, 20 आर्यिकाएं, 1 ऐलक, 4 क्षुल्लक एवं 1 क्षुल्लिका सहित कुल 36 साधु-साध्वी और 37 पीछियों का मंगल प्रवेश होगा।

फुलेरा का ऐतिहासिक संबंध

फुलेरा नगर का प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की परंपरा से विशेष संबंध रहा है। प्रथम पट्टाधीश आचार्य श्री वीरसागर जी महाराज का वर्ष 1952 में यहां चातुर्मास हुआ था। उसी दौरान आचार्य श्री शिवसागर जी तथा आचार्य श्री धर्मसागर जी महाराज ने भी फुलेरा में चातुर्मास किया था।

धर्मसागर जी से जुड़ा अद्भुत संयोग

फुलेरा के इतिहास में एक अनूठा कीर्तिमान भी दर्ज है। वर्ष 1952 में आचार्य श्री धर्मसागर जी महाराज क्षुल्लक अवस्था में यहां आए थे। इसी पंचकल्याणक महोत्सव में उन्हें ऐलक दीक्षा प्राप्त हुई और वर्षायोग के दौरान मुनि दीक्षा हुई। ऐसा दुर्लभ संयोग किसी अन्य पूर्वाचार्य के साथ किसी नगर में देखने को नहीं मिला।

आचार्य श्री का फुलेरा से आत्मीय जुड़ाव

आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज मुनि अवस्था में अपने दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्मसागर जी महाराज के साथ लूणवा जाते समय कई बार फुलेरा पधारे। वर्ष 1999 में आचार्य पदारोहण के बाद भी 14 जुलाई 1999 को लूणवा जाते समय वे फुलेरा आए थे। इसी कारण फुलेरा की जनता का उनके प्रति विशेष श्रद्धा और आत्मीय भाव रहा है।

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