भारत वर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थ संरक्षिणी महासभा की प्रदेश इकाई ने आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान आचार्य श्री ने धर्मायतनों की सुरक्षा पर बल देते हुए वर्द्धमानपुर (बदनावर) के ऐतिहासिक महत्व पर भी प्रकाश डाला। पढ़िए श्रीफल साथी ओम पाटोदी की यह रिपोर्ट।
बनेडिया/इंदौर। भारत वर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थ संरक्षिणी महासभा की प्रदेश इकाई के पदाधिकारियों ने देपालपुर के समीप विराजमान दिगंबर जैन प्राकृताचार्य पूज्य आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज ससंघ के दर्शन कर श्रीफल अर्पित किया तथा उनका मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। प्रतिनिधिमंडल में प्रदेशाध्यक्ष देवेन्द्र कुमार सेठी, कार्याध्यक्ष तल्लिन बड़जात्या, महामंत्री कैलाश लुहाड़िया, कोषाध्यक्ष राकेश पाटनी, पुरातत्व संयोजक एवं वर्द्धमानपुर शोध संस्थान के ओम पाटोदी सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
वर्द्धमानपुर के ऐतिहासिक महत्व पर हुई चर्चा
महासभा के पदाधिकारियों ने आचार्य श्री को इंदौर के निकट स्थित ऐतिहासिक नगर वर्द्धमानपुर (बदनावर) की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यहां हरिवंश पुराण एवं वृहद कथा कोष जैसे महत्वपूर्ण ग्रंथों की रचना हुई तथा सैकड़ों तीर्थंकर प्रतिमाएं एवं पुरातात्विक अवशेष प्राप्त हुए हैं। आचार्य श्री ने वर्द्धमानपुर पर तैयार शोध सामग्री का अवलोकन करते हुए इसके ऐतिहासिक नाम को पुनः स्थापित करने के प्रयासों की सराहना की और अपने उद्बोधन की शुरुआत भी वर्द्धमानपुर के जिनेन्द्र भगवान के स्मरण से की।
धर्मायतनों की सुरक्षा पर दिया विशेष बल
आचार्य श्री ने अपने प्रवचन में कहा कि वर्तमान समय में धर्मायतनों एवं तीर्थों की सुरक्षा समाज की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इसके लिए जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले समर्पित कार्यकर्ताओं की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि केवल मंचों पर दिखाई देने से धर्मरक्षा नहीं होती, बल्कि सेवा, समर्पण और सक्रियता से ही तीर्थों की रक्षा संभव है।
बुधवार को बनेडिया जी में होगा मंगल प्रवेश
बनेडिया ट्रस्ट कमेटी के देवेन्द्र सेठी ने बताया कि बुधवार, 8 जुलाई को आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज अपने विशाल संघ के साथ अतिशय क्षेत्र बनेडिया जी में भव्य मंगल प्रवेश करेंगे। इस अवसर पर सकल जैन समाज से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्मलाभ लेने का आग्रह किया गया है।
समाज से किया सहभागिता का आह्वान
महासभा के पदाधिकारियों ने कहा कि तीर्थ संरक्षण केवल संस्थाओं का नहीं, बल्कि पूरे समाज का दायित्व है। सभी श्रद्धालु धर्म, संस्कृति एवं ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण में सक्रिय सहभागिता निभाएं।













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