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नारी तीर्थकरों और महापुरुषों को जन्म देती है : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी


प्रथमाचार्य शांति सागर जी महाराज की मूल बाल ब्रह्मचारी पट्टपरंपरा के पंचम पट्टाघीश वात्सल्य वारिघि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ पारसोला सन्मति भवन में विराजित हैं। आचार्य श्री संघ के सानिध्य में प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठान हो रहे हैं। पढ़िए राजेश पंचोलिया की एक रिपोर्ट…


पारसोला। प्रथमाचार्य शांति सागर जी महाराज की मूल बाल ब्रह्मचारी पट्टपरंपरा के पंचम पट्टाघीश वात्सल्य वारिघि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ पारसोला सन्मति भवन में विराजित हैं। आचार्य श्री संघ के सानिध्य में प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठान हो रहे हैं। आयोजित धर्म सभा में आचार्य श्री ने अपनी धर्म देशना में बताया कि महिलाएं सहनशीलता की पहचान है, नारी के गर्भ से तीर्थंकर, मुनियों, महापुरुषों ने जन्म लिया है।नारी के बिना कोई भी कार्य पूर्ण नहीं होता है। नारी हर क्षेत्र में सफलतापूर्वक कार्य करती है ।नारी को परिवार में खान-पान और वेशभूषा मर्यादित रखना चाहिए। बच्चों के संस्कार घर से ही डाले जाते हैं। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने भ्रूण हत्या पर चिंता व्यक्त कर इसे धर्म के विरुद्ध बताया।

शाल, श्रीफल और स्मृति चिन्ह से स्वागत किया गया

आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व शांतिलाल वेलावत, नमन पचोरी श्याम लाल गोदावत, नाथूलाल कस्तुर चंद अखावत, प्रकाश बोहरा ने प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी एवं पूर्वाचार्यों के चित्रों का अनावरण कर दीप प्रज्वलित किया। सुषमा पचौरी, पूजा घाटलिया ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन वीरेंद्र सेठ ने किया। जयंतीलाल कोठारी अध्यक्ष दशा हूंमड समाज ने बताया कि आचार्य श्री के पारसोला में आहार विहार निहार तथा प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी आचार्य प्रतिष्ठपना शताब्दी महोत्सव में विशेष कर महिलाओं और नगर के समस्त मंडलों द्वारा तन मन धन से अमूल्य सहयोग दिया गया। इसी परिपेक्ष्य में नगर के सभी महिला मंडलों का बहुमान स्वागत श्रीफल, माला, स्मृति चिन्ह द्वारा वर्षा योग समिति के अध्यक्ष ऋषभ पचोरी परिवार के द्वारा किया गया। सभी महिला मंडल अपने निर्धारित वेशभूषा में शामिल हुए। ब्रह्मचारी गज्जू भैया एवं राजेश पंचोलिया ने बताया कि उदयपुर के भामाशाह शांतिलाल वेलावत तथा आचार्य सुनील सागर युवा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष नमन पचौरी भी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के दर्शनार्थ पधारे।पारसोला समाज द्वारा उनका भी नगर की गरिमा अनुसार शाल श्रीफल स्मृति चिन्ह से स्वागत किया गया।

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