समाचार

केंद्रीय मंत्री शिवराज से मिला जिन शासन एकता संघ का प्रतिनिधिमंडल : वैशाली शोध संस्थान को बचाने की मांग की


वर्तमान शासन नायक भगवान महावीर स्वामी की जन्मस्थली वैशाली स्थित ‘प्राकृत जैन शास्त्र एवं अहिंसा शोध संस्थान’ के अस्तित्व पर मंडरा रहे संकट को लेकर जिन शासन एकता संघ के संघ नायक राकेश जैन के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की। भोपाल से पढ़िए, यह रिपोर्ट…


भोपाल। वर्तमान शासन नायक भगवान महावीर स्वामी की जन्मस्थली वैशाली स्थित ‘प्राकृत जैन शास्त्र एवं अहिंसा शोध संस्थान’ के अस्तित्व पर मंडरा रहे संकट को लेकर जिन शासन एकता संघ के संघ नायक राकेश जैन के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की। राजेश जैन दद्दू ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने बिहार सरकार के तुगलकी निर्णय पर गहरी चिंता व्यक्त की। जिसमें संस्थान को उच्च शिक्षा विभाग से हटाकर कला एवं संस्कृति विभाग को हस्तांतरित करने की तैयारी की जा रही है। प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री को सौंपे ज्ञापन में स्पष्ट किया कि यह संस्थान केवल एक सरकारी कार्यालय नहीं, बल्कि स्वतंत्र भारत का पहला जैन संस्कृति का सरकारी प्राकृत एवं जैन दर्शन शोध संस्थान है। 23 अप्रैल 1956 को देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इसकी नींव रखी थी। संघ का आरोप है कि सरकार का यह निर्णय संस्थान की 70 साल पुरानी शोध संस्कृति और अकादमिक पहचान को पूरी तरह समाप्त कर देगा। दद्दू ने कहा कि इन प्रमुख बिंदुओं पर आपत्ति जताई है। सरकार का तर्क है कि डिजिटाइजेशन के लिए इसे हस्तांतरित किया जा रहा है, जबकि ज्ञापन के अनुसार संस्थान में ऐसी कोई महत्वपूर्ण पांडुलिपियाँ वर्तमान में उपलब्ध नहीं हैं, जो इस आधार को पुष्ट करें। उच्च शिक्षा विभाग से हटने के बाद यह संस्थान एक जीवंत शोध केंद्र के बजाय केवल एक साधारण ‘पुस्तकालय’ बनकर रह जाएगा। जब दरभंगा का संस्कृत संस्थान और नालंदा का पाली संस्थान सुचारू रूप से चल रहे हैं, तो केवल जैन संस्थान के साथ ऐसा अन्यायपूर्ण निर्णय क्यों लिया जा रहा है?

प्रतिनिधिमंडल में शामिल प्रमुख सदस्य

केंद्रीय मंत्री से मुलाकात के दौरान संघ नायक राकेश जैन गोहिल, वीरेंद्र अजमेरा, डॉ. मनोज जैन, रवि जैन पत्रकार, एड. योगेश जैन, पंडित जयदीप शास्त्री और अनिल जैन (सीए) सहित समाज के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। उन्होंने मंत्री से इस विषय में तत्काल व्यक्तिगत हस्तक्षेप करने और बिहार सरकार के अन्यायपूर्ण इस निर्णय को निरस्त करवाने की मांग की।

 राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ की मुख्य मांगें

संस्थान के हस्तांतरण के निर्णय को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। संस्थान को पुनः उच्च शिक्षा विभाग के अधीन लाया जाए। पिछले 20 वर्षों से लंबित नियुक्तियों को तत्काल पूरा कर शैक्षणिक गतिविधियों को गति दी जाए। इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के उत्कृष्ट शोध केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। केंद्रीय मंत्री चौहान ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और कहा कि वे शीघ्र ही इस विषय पर बिहार मुख्यमंत्री से बात करेंगे। जिन शासन एकता संघ ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक संस्थान की लड़ाई नहीं है, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा जैन संस्कृति के एक महत्वपूर्ण अध्याय को बचाने का संकल्प है। इसमें आपका एवं भारत सरकार का सहयोग अपेक्षित है। राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ के मंयक जैन ने कहा कि सरकार हमारी मांग मानले नहीं तो पुरे भारत वर्ष में सरकार के तुगलकी आदेश के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।

आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
0
+1
1
+1
0
Shree Phal News

About the author

Shree Phal News

Add Comment

Click here to post a comment

You cannot copy content of this page