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प्रतिभागियों ने नैनागिरि के ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व को देखा : विद्यार्थियों ने गहन आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया


श्री दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र (रेशंदीगिरि) नैनागिरि में चल रहे 21 दिवसीय राष्ट्रीय प्राकृत भाषा अध्ययन कार्यशाला के अंतर्गत तृतीय शैक्षणिक भ्रमण किया गया। इस भ्रमण के दौरान प्रतिभागियों ने ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व के श्री दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र नैनागिरि के अंतर्गत स्थित सिद्धशिला, वज्रशिला आदि स्थलों का अवलोकन किया। नैनागिरि से पढ़िए, रत्नेश जैन रागी की यह खबर…


नैनागिरि (बकस्वाहा)। बकस्वाहा तहसील अंतर्गत श्री दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र (रेशंदीगिरि) नैनागिरि में चल रहे 21 दिवसीय राष्ट्रीय प्राकृत भाषा अध्ययन कार्यशाला के अंतर्गत तृतीय शैक्षणिक भ्रमण किया गया। इस भ्रमण के दौरान प्रतिभागियों ने ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व के श्री दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र नैनागिरि के अंतर्गत स्थित सिद्धशिला, वज्रशिला आदि स्थलों का अवलोकन किया। यहां श्री वरदत्त सहित पंच ऋषिराजों की निर्वाण स्थली के दर्शन कर विद्यार्थियों ने गहन आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया तथा वज्रघोष हाथी की प्रतिकृति रूप में वज्रशिला सहित क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को निहारा। भ्रमण के दौरान प्रतिभागियों को एक ही वृक्ष में गुंजा, बेर, अर्जुन और केम के चार वृक्षों का समाहित होना जैसा दुर्लभ प्राकृतिक दृश्य देखने को मिला।

साथ ही चिरौंजी जैसी क्षेत्रीय वनस्पतियों तथा नीलकंठ और विभिन्न वर्णों वाली गौरैया जैसे दुर्लभ पक्षियों का अदभुत रूप का अवलोकन किया। इस शैक्षणिक भ्रमण में प्राकृत भाषा विकास अधिकारी डॉ. धर्मेंद्रकुमार जैन, मुख्य प्रशिक्षक प्रो. जगत राम भट्टाचार्य तथा प्रशिक्षक डॉ. प्रभात कुमार दास, डॉ. सत्येंद्र कुमार जैन एवं डॉ. सोनलकुमार जैन का मार्गदर्शन एवं सहयोग सराहनीय रहा।

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