उपाध्याय मुनिश्री विहसंतसागरजी महाराज का शुक्रवार शाम को बड़े जैन मंदिर में भव्य मंगल आगमन होने जा रहा है। आचार्य विरागसागर सागर जी महाराज के शिष्य उपाध्याय मुनिश्री विहसंतसागरजी महाराज एवं मुनिश्री विश्वसाम्य सागर जी महाराज का मंगल पद विहार आगरा की ओर चल रहा है। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर…
मुरैना। उपाध्याय मुनिश्री विहसंतसागरजी महाराज का शुक्रवार शाम को बड़े जैन मंदिर में भव्य मंगल आगमन होने जा रहा है। आचार्य विरागसागर सागर जी महाराज के शिष्य उपाध्याय मुनिश्री विहसंतसागरजी महाराज एवं मुनिश्री विश्वसाम्य सागर जी महाराज का मंगल पद विहार आगरा की ओर चल रहा है। ग्वालियर में पनिहार के निकट स्थित जैन तीर्थ जिनेश्वर धाम में भव्यतिभव्य जिन प्रतिमाओं का महामस्तकाभिषेक एवं विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान कराने के बाद मुनिश्री ने कड़ाके की सर्दी में आगरा की ओर पद विहार जारी रखा है। उपाध्याय मुनिश्री विहसंतसागरजी महाराज के मंगल नगरागमन पर स्थानीय जैन समाज उनकी अगवानी में उमड़ेगा। सभीजन शनिवार 10 जनवरी को एबी रोड ग्वालियर हाइवे पर पहुंचकर मुनिराजों का पाद प्रक्षालन कर, आरती करते हुए उनके श्री चरणों में श्रीफल अर्पितकर अगवानी करेंगे।
भव्य शोभायात्रा के साथ होगा नगर प्रवेश
शनिवार 10 जनवरी को दोपहर 2 बजे नगर की सीमा बेरियर चौराहे से जैन संतों को बैंडबाजों के साथ भव्य शोभायात्रा के रूप में नगर के प्रमुख मार्गाे से होते हुए बड़े जैन मंदिर में प्रवेश कराया जाएगा। विभिन्न स्थानों पर मुनिराजों का पाद प्रक्षालन एवं आरती करते हुए अगवानी की जाएगी। भव्य शोभायात्रा में जैन समाज का पुरुष वर्ग श्वेत वस्त्रों में एवं महिलाएं केसरिया परिधान में शामिल होंगी। युवा साथी हाथों में पचरंगीन ध्वजा को लहराते हुए चलायमान होंगे। सभी लोग जैन भजन, जिनेंद्र प्रभु की स्तुति एवं भगवान महावीर के संदेशों को उच्चारित कर अपनी खुशी का इजहार करेंगे।
शीतलहर और कोहरे में पद विहार एक कठोर तप
कड़कड़ाती सर्दी एवं कोहरे में जैन संतों का पद विहार उनकी कठोर तपस्या और संयम का प्रतीक है। जहां वे बिना वस्त्र (दिगंबर संत) या अल्प वस्त्रों में, कड़ाके की ठंड में भी पैदल यात्रा करते हैं, क्योंकि सर्दी-गर्मी को वे ‘परिषह’ (कष्ट) मानकर सहन करते हैं। भक्तगण उनके पद विहार को सफल बनाने में सहयोग करते हैं, ताकि वे धर्म का संदेश जन-जन तक पहुंचा सकें। जैन संत सर्दी, गर्मी, बरसात जैसे सभी मौसमों में अपनी चर्या का पालन करते हैं और शीतकाल को एक स्वाभाविक परिषह मानते हैं। जैन संत हमेशा पैदल चलते हैं और किसी भी भौतिक सुख-सुविधा का त्याग करते हैं, जिससे उनका मन और शरीर कठोर साधना के लिए तैयार होता है। जैन संतों की इस तपस्या को देखकर लोग अचंभित होते हुए उन्हें वार बार नमन करते हैं।
एबी रोड ग्वालियर हाइवे पर होगा आहार
शनिवार 10 जनवरी की आहारचर्या प्रातः 10 बजे एबी रोड ग्वालियर हाइवे पर राकेश जैन टायर वालों के निज निवास पर होगी। सामायिक के बाद दोपहर 2 बजे श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा मंदिर मुरैना के लिए मंगल पद विहार होगा।













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