परम पूज्य आचार्य श्री देवनंदी गुरुदेव के परम शिष्य मुनि श्री अर्जित सागर महाराज का रामगंजमंडी नगर में मंगल आगमन हुआ। दोपहर की बेला में महाराज श्री ने मोडक से बिहार करते हुए रामगंजमंडी नगर में मंगल प्रवेश किया। इस दौरान मार्ग में खैराबाद दिगंबर जैन मंदिर में भी दर्शन किए। नगर सीमा में प्रवेश करते ही जगह-जगह गुरुदेव का पाद प्रक्षालन एवं मंगल आरती कर भावभीनी अगवानी की गई। पढ़िए अभिषेक जैन लुहाड़िया की रिपोर्ट…
रामगंजमंडी। परम पूज्य आचार्य श्री देवनंदी गुरुदेव के परम शिष्य मुनि श्री अर्जित सागर महाराज का रामगंजमंडी नगर में मंगल आगमन हुआ। दोपहर की बेला में महाराज श्री ने मोडक से बिहार करते हुए रामगंजमंडी नगर में मंगल प्रवेश किया। इस दौरान मार्ग में खैराबाद दिगंबर जैन मंदिर में भी दर्शन किए। नगर सीमा में प्रवेश करते ही जगह-जगह गुरुदेव का पाद प्रक्षालन एवं मंगल आरती कर भावभीनी अगवानी की गई।
महाराज श्री के मंगल विहार में सुनील जैन चाचा, महेश कटारिया, हार्दिक कटारिया, दर्पक कटारिया, नितिन जैन, भूपेंद्र जैन, शुभम जैन सहित अनेक श्रावकों ने सहभागिता प्रदान की।
गुरुदेव ने महावीर दिगंबर जैन मंदिर के दर्शन किए, तत्पश्चात श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर पधारे। मंदिर के प्रवेश द्वार पर संरक्षक अजीत सेठी, अध्यक्ष दिलीप विनायका, उपाध्यक्ष कमल लुहाड़िया, कोषाध्यक्ष धर्मेंद्र लुहाड़िया, रमेश विनायका सहित मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने मंगल पाद प्रक्षालन एवं आरती कर गुरुदेव की अगवानी की। इसके पश्चात महाराज श्री ने जिनालय के दर्शन किए तथा मंदिर की परिक्रमा करते हुए प्रतिमाओं को एकटक निहारा।
महाराज श्री ने मूलनायक शांतिनाथ भगवान को अतिशययुक्त बताते हुए कहा कि यहां की प्रतिमाओं के दर्शन से मन गदगद हो गया और पैदल चलने की सारी थकान दूर हो गई। उन्होंने मंदिर समिति एवं समाज की भक्ति की सराहना करते हुए कहा कि यहां हुए अनेक चातुर्मासों के संस्कार आज भी पल्लवित होते हुए दिखाई देते हैं।
महाराज श्री के त्याग की बात करें तो उन्होंने नमक, तेल, घी, शक्कर, मुनक्का का त्याग कर रखा है। इसके साथ ही दूध एवं दूध से बनी वस्तुओं, फल, हरी सब्जी तथा गेहूं का भी आजीवन त्याग दीक्षा के समय ही कर दिया था, जो पंचम काल में अद्भुत तपस्या मानी जाती है।
गुरुदेव को आगामी समय में नासिक स्थित णमोकार तीर्थ जाना है, जहां फरवरी माह में भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव आयोजित होने जा रहा है। यह तीर्थ वर्तमान में लगभग 700 किलोमीटर दूर है। इस महोत्सव में 400 से अधिक पिच्छिका धारी साधुओं के पहुंचने की संभावना है तथा लगभग तीन हजार प्रतिमाओं का पंचकल्याणक संपन्न होगा।
गुरुवार प्रातः बेला में महाराज श्री के मंगल प्रवचन एवं मंगल आहारचर्या का आयोजन किया जाएगा।













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