आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में सहस्त्रकूट जिनालय का भूमिपूजन हुआ था। छतरपुर जिले के द्रोणागिरी (लघु सम्मेद शिखर) के उदासीन आश्रम में सहस्त्रकूट जिनालय का निर्माण चल रहा है। करीब 7 करोड़ रुपए से 7 मंजिल, 100 फीट ऊंचाई का सहस्त्रकूट जिनालय बनाया जा रहा है। सागर से पढ़िए, मनीष जैन विद्यार्थी की यह रिपोर्ट…
सागर। आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में सहस्त्रकूट जिनालय का भूमिपूजन हुआ था। छतरपुर जिले के द्रोणागिरी (लघु सम्मेद शिखर) के उदासीन आश्रम में सहस्त्रकूट जिनालय का निर्माण चल रहा है। करीब 7 करोड़ रुपए से 7 मंजिल, 100 फीट ऊंचाई का सहस्त्रकूट जिनालय बनाया जा रहा है। दर्शन के लिए लिफ्ट सुविधा उपलब्ध कराई गई है। बुंदेलखंड के लघु सम्मेद शिखर तीर्थधाम स्थित उदासीन आश्रम में सभी के सहयोग से जैन समाज के श्रद्धालुओं द्वारा सबसे ऊंचा जिन सहस्त्रकूट जिनालय का निर्माण करवा रहे हैं। आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज के सान्निध्य में पंचकल्याणक महोत्सव होगा। आश्रम के प्रचार मंत्री मनीष विद्यार्थी, प्रकाश अदावन ने बताया कि निर्माणाधीन जिनालय के लिए 60 बाई 60 फीट का फाउंडेशन तैयार कर 12 फीट जमीन में खुदाई की गई। इसके बाद खुदाई लेबल से 11फीट ऊंचा फाउंडेशन बनाया गया। सात मंजिला सहत्रकूट जिनालय का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद जिनालय के सभी सातों तल पर वेदियां पर 1008 प्रतिमाएं पदमासन मुद्रा में चारों दिशाओं में स्थापित होंगी।
गुरुदत्तादि मुनिराजों की निर्वाण एवं साधना स्थल है यह तीर्थ
श्यामरी नदी के तट स्थित गुरुदत्तादि साढ़े आठ करोड़ मुनिराजों की निर्वाण एवं साधना स्थली पर 1972 से उदासीन आश्रम संचालित है। पूज्य गणेश प्रसाद वर्णी के शब्दों में वर्णित सिद्धक्षेत्र लघु सम्मेद शिखरश् तीर्थ के इस उदासीन आश्रम में साधु संत, त्यागी व्रती, वृद्धजन जो घर से उदासीन हो गए हैं। अपना कल्याण करने यहां पर साधना में निरंतर लीन रहते हैं। आचार्य श्री कहते हैं कि अपने जीवन काल मे कम से कम चावल बराबर मूर्ति विराजमान करने का सौभाग्य अवश्य ही प्राप्त करना चाहिए। पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के आशीर्वाद से 7 मंजिला (शिखर सहित) सहस्त्रकूट जिनालय का भव्य निर्माण पूर्णताः की ओर है। इसका पंचकल्याणक महा महोत्सव आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के मंगल सान्निध्य होगा। पंचकल्याणक महोत्सव तारीख तय के लिए ट्रस्ट,प्रबंध समिति की बैठक हुई। जिसमें तेदुखेडा में विराजमान आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज को 14 दिसंबर रविवार को श्रीफल अर्पित कर महोत्सव के लिए सान्निध्य का आशीर्वाद लेंगे।
उदासीन आश्रम में जैन धर्म की होती हैं कई गतिविधियां
समिति के मंत्री गजेंद्र जैन बड़ा मलहरा ने बताया कि इस जिनालय का निर्माण कुशल कारीगर कर रहे हैं। तीर्थ क्षेत्र के उदासीन आश्रम में जैन धर्म की अनेक गतिविधियां संचालित होती हैं। बुंदेलखंड की इस धरा पर यह बहुत बड़ा एवं प्राचीन धार्मिक सिद्ध तीर्थ है। आचार्य श्री बताते हैं कि सहस्त्रकूट जिनालय में तीर्थंकर भगवान के 1008 सार्थक नामों के प्रतीक जिनबिम्ब निर्मित होते हैं। जिनके दर्शन पूजन से अनंतगुण स्वरुप आत्मा का बोध होता है। वहीं अनेक संकट बाधाएं दूर हो जाती हैं। आपको बता दें कि इस सहत्रकूट जिनालय के बन जाने से तीर्थ क्षेत्र जैन समाज के बड़े तीर्थ में शुमार हो जाएगा।













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