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श्री क्षेत्र श्रवणबेलगोला में प्रथम मंगल प्रवेश सानंद हुआ : पट्टाभिषेक महोत्सव के 48 दिवसीय साधना पूर्ण होने पर अभिनंदन किया गया।


श्रीमद् अभिनव स्वस्तिश्री अरिहंतकीर्ति भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामी जी श्रीक्षेत्र मुनिसुव्रतनाथ समवशरण दिगम्बर जैन मठ भरूच गुजरात का श्रीक्षेत्र श्रवणबेलगोला कर्नाटक में प्रथम मंगल प्रवेश हुआ। उत्तर भारत में भट्टारक परम्परा का उदय माना जा रहा है।श्रवणबेलगोला से पढ़िए, यह खबर…


श्रवणबेलगोला। श्रीमद् अभिनव स्वस्तिश्री अरिहंतकीर्ति भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामी जी श्रीक्षेत्र मुनिसुव्रतनाथ समवशरण दिगम्बर जैन मठ भरूच गुजरात का श्रीक्षेत्र श्रवणबेलगोला कर्नाटक में प्रथम मंगल प्रवेश हुआ। उत्तर भारत में भट्टारक परम्परा का उदय माना जा रहा है। सुप्रसिद्ध महातीर्थ श्रीक्षेत्र श्रवणबेलगोला कर्नाटक में स्थित है। उत्तर भारत के 21वीं सदी के प्रथम भट्टारक के रूप में आचार्य श्री प्रज्ञा सागर जी महाराज एवं जगद्गुरु कर्मयोगी स्वस्तिश्रीचारुकीर्ति पंडिताचार्यवर्य भट्टारक महास्वामी जी के शिष्य श्रीमद् अभिनव स्वस्तिश्री अरिहंतकीर्ति भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामी जी का अतिभव्य स्वागत अभिनंदन किया गया। श्रीक्षेत्र श्रवणबेलगोला के अभिनव स्वस्तिश्री चारुकीर्ति पंडिताचार्य पट्टाचार्य भट्टारक महास्वामी जी एवं भट्टारक चिंतामणी स्वस्तिश्री धवलकीर्ति भट्टारक महास्वामी जी श्रीक्षेत्र अरिहंत गिरी तमिलनाडु के द्वारा पट्टाभिषेक महोत्सव के 48 दिवसीय साधना पूर्ण होने पर भव्य स्वागत अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर जैन समाज श्रवणबेलगोला द्वारा एवं कूष्मांडिनी महिला समाज, गुरुकुल के बच्चों एवं श्रीक्षेत्र श्रवणबेलगोला के संपूर्ण मैनेजमेंट कमेटी द्वारा पूज्य नूतन स्वामी जी श्री अरिहंतकीर्ति भट्टारक महास्वामी जी का भव्य शोभा यात्रा के साथ विद्यानंद जी निलय से मनोरम बग्गी में बिठा कर श्री विंध्यगिरी पर्वत के समक्ष पाद पूजा करके श्रवणबेलगोला गुरु पीठ परम्परा अनुसार पालखी यात्रा निकाली गई।

जिसमें नूतन स्वामी जी को विराजमान कर नगर की परिक्रमा करते हुए श्री.मठ मंदिर में पुष्पवृष्टि के साथ श्री चंद्रप्रभु भगवान के दर्शन कराए गए। तत्पश्चात भंडार बसदि स्थित अतिप्राचीन चौबीसी प्रतिमाओं के चरणों में पुष्पार्चन किया। तत्पश्चात क्षेत्र के द्वारा शॉल माला श्रीफल वस्त्र फल आदि भेंट करके भव्य स्वागत किया गया। ये श्रवणबेलगोला क्षेत्र की परंपरा है। इसके बाद अभिनव स्वस्तिश्री चारुकीर्ति पंडिताचार्य पट्टाचार्य महास्वामी जी ने कहा कि अरिहंत कीर्ति स्वामी जी वर्ष 2018 के मस्तकाभिषेक के समय से बड़े स्वामी जी के पास रहकर भट्टारक की शिक्षा साधना ब्र.संजीव भैया के रूप में रहकर प्राप्त की। जप तप करते हुए बड़े स्वामी जी के अनुभव को प्राप्त करते रहे हैं। श्रवणबेलगोला क्षेत्र के द्वारा स्थापित उत्तर भारत में प्रथम पीठ गुजरात में विराजमान की गई है। जगद्गुरु कर्मयोगी स्वस्तिश्रीचारुकीर्ति पंडिताचार्यवर्य भट्टारक महास्वामी जी ने वर्ष 2023 में अपनी समाधि के पूर्व की श्री अरिहंतकीर्ति स्वामीजी को तमिलनाडु में श्रीक्षेत्र अरिहंतगिरि में स्वस्ति श्री धवलकीर्ति स्वामी जी के सानिध्य में भेज दिया। इसी बात को ध्यान में रख कर विगत 12 अक्टूबर को कोटा राजस्थान में भट्टारक के संस्कार कर विचार पट्ट प्रमेय सागर जी को अरिहंत गिरी में बाकी की शिक्षा प्राप्त की।

इसलिए नवीन नाम अरिहंत कीर्ति नामकरण किया गया था।जिनधर्म की श्रमण परंपरा की सेवा करते हुए महती प्रभावना करें। इन्हीं शुभकामनाओं के साथ श्रीक्षेत्र श्रवणबेलगोला में प्रथम मंगल प्रवेश सानंद हुआ।

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