दिगंबर जैन मंदिर में मंगलवार को दूसरे दिन मुनिश्री विभंजनसागर जी के सान्निध्य में प्रभातकालीन धार्मिक अनुष्ठान हुए। महावीर स्वामी के अभिषेक, शांतिधारा पाठ और पूजा के बाद आहार क्रिया आयोजित की गई। इसके बाद हुई धर्मसभा में नगर व आसपास के क्षेत्र से बड़ी संख्या में जैन अनुयायी पहुंचे। मुनिश्री का आशीर्वाद प्राप्त किया। धर्मसभा के पूर्व मुनिश्री विभंजनसागर जी ने लोहानी गुफा में साधना की। मांडू से पढ़िए, यह साभार संकलित खबर…
मांडू। नगर के दिगंबर जैन मंदिर में मंगलवार को दूसरे दिन मुनिश्री विभंजनसागर जी के सान्निध्य में प्रभातकालीन धार्मिक अनुष्ठान हुए। महावीर स्वामी के अभिषेक, शांतिधारा पाठ और पूजा के बाद आहार क्रिया आयोजित की गई। इसके बाद हुई धर्मसभा में नगर व आसपास के क्षेत्र से बड़ी संख्या में जैन अनुयायी पहुंचे। मुनिश्री का आशीर्वाद प्राप्त किया। धर्मसभा के पूर्व मुनिश्री विभंजनसागर जी ने लोहानी गुफा में साधना की। उन्होंने कहा कि मांडू क्षेत्र में जो शांति का अनुभव मैंने किया। उसकी मैंने कल्पना भी नहीं की थी। यह क्षेत्र वास्तव में धर्म की नगरी है और यहां ईश्वर भक्ति के दुर्लभ स्थान विद्यमान हैं। मुनिश्री ने कहा कि कर्म का सिद्धांत जीवन का केंद्रीय आधार है। मनुष्य को केवल कर्म करने का अधिकार है। उसका फल ईश्वर पर छोड़ देना चाहिए।
अच्छा कर्म ही सच्ची ईश्वर भक्ति
गीता के कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन श्लोक का उल्लेख करते हुए मुनिश्री ने निष्काम कर्म को मोक्ष का मार्ग बताया। उन्होंने कहा कि अच्छे कर्म ही भाग्य बनाते हैं। भाग्य और कर्म एक-दूसरे के पूरक हैं। कर्म बिना भाग्य फलता नहीं और भाग्य बिना कर्म गति नहीं पाता। निस्वार्थ भाव से किया गया अच्छा कर्म ही सच्ची ईश्वर भक्ति है, क्योंकि सेवा, दान और करुणा आत्मा की शुद्धि करते हैं। परमात्मा तक पहुंचने का मार्ग बनते हैं। उन्होंने आत्मा और परमात्मा की एकता पर आधारित आध्यात्मिक सिद्धांत की भी व्याख्या की।
यह रहे कार्यक्रम में मौजूद
कार्यक्रम में समाज सचिव संजय छाबड़ा, मौसम झांझरी, संजय दिलावरा, विजय रावका, अजय छाबड़ा, यश पवन छाबड़ा आदि अनुयायी मौजूद रहे।













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