समाचार

दीपावली: अहिंसा और प्रकाश का पर्व, पटाखों से नहीं दीपों से सजाएँ : स्वस्थ, सादगीपूर्ण और मंगलकारी दीपावली के लिए पटाखों को कहें “न”


भारत में दीपावली का पर्व प्रकाश, सादगी और अहिंसा का प्रतीक है। पटाखों की बजाय दीपक जलाकर हम स्वास्थ्य, पर्यावरण और संस्कृति की रक्षा कर सकते हैं। व्याकरणाचार्य आकाश जैन ने अपने लेख में बताया कि दीपावली का असली अर्थ है ज्ञान और शांति का प्रकाश फैलाना, न कि विस्फोट और प्रदूषण। पढ़िए व्याकरणाचार्य आकाश जैन, चिरगांव, जिला झांसी (उत्तर प्रदेश) की रिपोर्ट…


भारत की सांस्कृतिक परंपरा में दीपावली का स्थान अत्यंत पावन और महत्वपूर्ण है। यह पर्व हर भारतीय हृदय में उत्साह, श्रद्धा और उमंग का संचार करता है। दीपावली का संबंध भगवान श्रीरामचंद्र और भगवान महावीर स्वामी से जुड़ा है। श्रीराम के अयोध्या लौटने का उल्लास और महावीर स्वामी के निर्वाण दिवस की श्रद्धा, दोनों ही मानवता और आत्म-विजय का प्रतीक हैं।

 

पटाखों का चलन भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं, बल्कि विदेशी आक्रांताओं से आया दासत्व का प्रतीक है। इसके अलावा, बारूद स्वास्थ्य, पर्यावरण और पशु-पक्षियों के लिए हानिकारक है। ध्वनि और धुएँ से नवजात शिशु, गर्भवती महिलाओं और वयस्कों तक प्रभावित होते हैं।

 

व्याकरणाचार्य आकाश जैन का कहना है कि दीपावली का वास्तविक अर्थ अहिंसा, करुणा और प्रकाश का उत्सव है। दीपक का शांत प्रकाश अधिक स्थायी और मंगलकारी है, जबकि पटाखे अस्थायी चमक और प्रदूषण फैलाते हैं। हमें बच्चों को भी यह सिखाना चाहिए कि दीपावली का आनंद प्रकाश और सादगी में है।

 

इस दीपावली, आइए हम सब मिलकर पटाखों को “न” कहें और दीपक जलाकर अपने घर, समाज और पर्यावरण को सुरक्षित एवं मंगलमय बनाएँ।

 

🪔✨ अहिंसा की दीपावली मनाएँ — बारूद नहीं, प्रकाश जलाएँ! ✨🪔

आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
6
+1
1
+1
0
Shreephal Jain News

About the author

Shreephal Jain News

Add Comment

Click here to post a comment

You cannot copy content of this page