टोंक के श्री चंद्रप्रभु जिनालय में 7 से 12 नवंबर तक आयोजित होने वाले पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव हेतु प्रमुख पात्रों का चयन आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के सानिध्य में हुआ। सौधर्म इंद्र का सौभाग्य महेंद्र जैन लदाना (अमेरिका निवासी) को प्राप्त हुआ। आचार्य श्री ने धर्मसभा में जिनालय की महिमा और जिनवाणी का महत्व बताया। पढ़िए राजेश पंचोलिया की रिपोर्ट…
टोंक के श्री चंद्रप्रभु जिनालय नसिया में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव हेतु प्रमुख पात्रों का चयन आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के सानिध्य और विशाल संघ की उपस्थिति में हुआ। यह आयोजन 7 नवंबर से 12 नवंबर तक चलेगा। पात्र चयन प्रक्रिया बोली के माध्यम से की गई, जिसमें सौधर्म इंद्र का सौभाग्य अमेरिका निवासी महेंद्र कुमार जैन लदाना को मिला। इसके साथ ही भगवान के मातापिता, कुबेर, सनत, मुख्य यज्ञनायक और अनेक इंद्रों का चयन भी हुआ।
आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने धर्मसभा में पुरानी स्मृतियों को साझा करते हुए कहा कि अरिहंत भगवान परम उपकारी हैं, जिनकी दिव्य ध्वनि धर्म का मार्ग दिखाती है। उन्होंने जिनालय की महत्ता को समझाते हुए कहा कि यह जीवन निर्माण में उपयोगी माध्यम है और भगवान की प्रतिमाओं में गुण आरोपण से हमें धर्म का अनुभव मिलता है।
जीवन का आधार बनाने का संदेश
आर्यिका श्री महायशमति माताजी ने उपदेश में बताया कि गुरु आचार्य साधु भगवान की प्रतिकृति होते हैं और उनकी सेवा एवं वेयावृति करना महान पुण्य का कार्य है। समाधि मरण की भावना अपनाने और साधु-संतों के मार्गदर्शन को जीवन का आधार बनाने का संदेश उन्होंने दिया। धर्मसभा में गजकुमार मुनि की कथा का उल्लेख हुआ, जिसमें आत्मचिंतन, वैराग्य और समता के माध्यम से मोक्ष प्राप्ति का मार्ग बताया गया।आयोजन समिति के ओमप्रकाश, शैलेन्द्र और राजेश अरिहंत ने जानकारी दी कि महायज्ञनायक का सौभाग्य रतनलाल जी सोगानी परिवार को प्राप्त हुआ, जबकि यज्ञनायक इंदरजी सिद्धार्थजी सोगानी सहित अनेक इंद्रों का चयन हुआ।













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