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शिक्षा ही जीवन का सच्चा धन – नवागढ़ गुरुकुल में गूँजे प्रेरक विचार : डॉ. सत्येंद्र जैन और डॉ. सारिका जैन ने बच्चों को दिया शिक्षा का अमूल्य संदेश


नवागढ़ गुरुकुलम में पधारे डॉ. सत्येंद्र कुमार जैन और डॉ. ब्रह्मचारिणी सारिका जैन ने बच्चों को शिक्षा, अनुशासन और लक्ष्य निर्धारण पर प्रेरक विचार दिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही जीवन का सच्चा धन है और संस्कारों के साथ इसे अपनाना ही वास्तविक प्रगति है। पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट…


प्रागैतिहासिक अतिशय क्षेत्र नवागढ़ की पावन भूमि पर एक प्रेरणादायी अवसर देखने को मिला, जब दमोह से पधारे भूगर्भ वैज्ञानिक एवं वरिष्ठ शिक्षाविद डॉ. सत्येंद्र कुमार जैन तथा अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त डॉ. ब्रह्मचारिणी सारिका जैन ने गुरुकुलम के बच्चों से भेंट की और उन्हें शिक्षा के महत्व पर विशेष मार्गदर्शन प्रदान किया।

डॉ. सत्येंद्र जैन ने अपने उद्बोधन में कहा कि “शिक्षा जीवन का असली धन है, जिसे कोई छीन नहीं सकता।” उन्होंने छात्रों को अनुशासन, नियमित अध्ययन और समय सारिणी का पालन करने का संदेश दिया। उन्होंने यह भी बताया कि कठिन परिश्रम और धैर्य ही सफलता की कुंजी है। उनकी प्रेरक बातें सुनकर बच्चों के चेहरे पर उत्साह और जोश झलक उठा।

पढ़ाई बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखती

डॉ. सारिका जैन ने छात्रों को आत्मविश्वास, एकाग्रता और समय प्रबंधन के महत्व पर विशेष रूप से मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि सही दिशा में की गई पढ़ाई बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखती है। साथ ही स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि शिक्षा को केवल परीक्षा पास करने का साधन न समझें, बल्कि इसे जीवन संवारने का अवसर मानें।

इस अवसर पर बाल ब्रह्मचारी जय निशांत जी भैया जी ने भी विचार रखे। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल रोजगार पाने का साधन नहीं है, बल्कि जीवन को संस्कारित और मूल्यवान बनाने की प्रक्रिया है। शिक्षा से विवेक, धैर्य और सहनशीलता का विकास होता है और संस्कारों के साथ यही सच्ची प्रगति का मार्ग है।

गुरुकुलम में उपस्थित बच्चों ने अतिथियों के मार्गदर्शन को आत्मसात करते हुए गहरी प्रेरणा ली। बच्चों के लिए यह अवसर एक अविस्मरणीय अनुभव रहा।

अंत में शिक्षक अनुराग जैन ने सभी का आभार व्यक्त किया और कहा कि ऐसे अवसर बच्चों के जीवन में नई दिशा और ऊर्जा का संचार करते हैं। कार्यक्रम का समापन गुरु वंदना और बच्चों की उल्लासपूर्ण तालियों के बीच हुआ, जिससे पूरा वातावरण शिक्षा और संस्कारों की सुगंध से भर उठा।

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