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मन शांत होगा तो इंद्रियां अपने आप शांत रहेंगी: मुनिश्री सिद्ध सागर जी ने मन को चंचल और तीव्र धावक बताया 


नांद्रे। आचार्यश्री विशुद्धसागर जी महाराज के शिष्य मुनिराजों का चातुर्मास नांद्रे के भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में जारी है। यहां पर उनके प्रवचन रोज हो रहे हैं। इस प्रवचन में स्थानीय और आसपास के लोग बड़ी संख्या में आकर धर्मलाभ ले रहे हैं। मुनिश्री सिद्धसागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में मन पर नियंत्रण करने की सीख देते हुए इंद्रियों पर भी नियंत्रण के प्रति लोगों को जाग्रत किया। नांद्रे से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर…


नांद्रे। आचार्यश्री विशुद्धसागर जी महाराज के शिष्य मुनिराजों का चातुर्मास नांद्रे के भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में जारी है। यहां पर उनके प्रवचन रोज हो रहे हैं। इस प्रवचन में स्थानीय और आसपास के लोग बड़ी संख्या में आकर धर्मलाभ ले रहे हैं। मुनिश्री सिद्धसागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में मन पर नियंत्रण करने की सीख देते हुए इंद्रियों पर भी नियंत्रण के प्रति लोगों को जाग्रत किया। उल्लेखनीय है कि पट्टाचार्य विशुद्धसागरजी महाराज के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज, मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज और क्षुल्लक श्री श्रुतसागर महाराज भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर, विराजित हैं और यहां पर धर्म प्रभावना प्रस्तुत कर रहे हैं। गुरुवार को मुनि श्री सिद्ध सागरजी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि आचार्य श्री पूज्यपाद स्वामी ग्रंथराज इष्टोपदेश में बता रहे हैं, आत्म ध्यान की सिद्धि इंद्रिय विषयों में लीन जीव के लिए संभव नहीं है।

इंद्रियों को वश करने के लिए मन को वश करना पड़ेगा। जिस प्रकार घोडे को वश करने के लिए लगाम लगानी पड़ती है। उसी प्रकार इंद्रियों को वश करने के लिए मन जो घोडे से भी तेज दौड़ता है, इस पर लगाम लगा दो तो इंद्रिया स्वमेव ही वश में हो जाएंगी। विकारों का उद्भव इंद्रियों में नहीं होता, इंद्रिया तो विकारों की पूर्ति में लग जाती हैं। सर्वप्रथम मन में ही विकार उत्पन्न होता है। आज व्यक्ति संसार में सुख खोजने में लगा हुआ है, वैज्ञानिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए नए-नए अविष्कार करने में लगे हैं। कूलर, पंखा, एसी, टीवी, मोबाइल, ट्रेन, प्लेन न जाने कितने अविष्कार किए हैं कि व्यक्ति को कष्ट न हो सके, फिर भी व्यक्ति सुखी नहीं हो पा रहा है क्योंकि, सुख बाह्य वस्तु में नहीं है।

सुख तो हमारे अंदर ही है। अपनी इच्छाओं को कम कर लो मन की चंचलता को कम कर लो आनंद आने लगेगा। शरीर की गंदगी को हटाने के लिए आप पानी का प्रयोग करते हो, ऐसे ही मन की गंदगी को हटाने के लिए जिनवानी का प्रयोग करो। देव, शास्त्र, गुरु की शरण में जाने से मन की गंदगी हट जाती है। मन को शांत कर लोगे तो इंद्रियां भी शांत हो जाएंगी।

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