मुनि श्री सारस्वत सागर महाराज जी ने अपने प्रवचन में कहा कि जीवन में बनो परीक्षार्थी। हम हर समय, हम हर जगह अपने को परीक्षार्थी बनाकर के चलें। नांद्रे से पढ़िए, यह खबर…
नांद्रे। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद कोल्हापुर के कार्याध्यक्ष श्री अभिषेक अशोक पाटील, कोल्हापुर ने कहा कि पट्टाचार्य विशुद्धसागरजी महाराज के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज,मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज और क्षुल्लक श्रुतसागरजी महाराज भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान हैं। मुनि श्री सारस्वत सागर महाराज जी ने अपने प्रवचन में कहा कि जीवन में बनो परीक्षार्थी। हम हर समय, हम हर जगह अपने को परीक्षार्थी बनाकर के चलें क्योंकि, जब परीक्षा आती है तो आप अपने को उत्तीर्ण करने के लिए रात -दिन एक कर देते हो कि परीक्षा का परिणाम सफलता और विकास को लेकर आए, न कि असफलता और अविकास को लेकर आए। ठीक उसी प्रकार हमें अपने को परीक्षार्थी बनाना है कि जो आगे आने वाली पर्याय है वो हमारी हर्षमय हो। हर एक अवस्था आपकी परीक्षा और परीक्षा का परिणाम है। जीवन परिमाण है तो नियम से परिणाम अच्छा होगा।
हर एक चीज का परिणाम होना जरुरी है चाहे धन का, चाहे तन का, चाहे वचन का और चाहे मन आदि का। परिमाण करने पर परिणाम हमारे अशुभ से बच जाते हैं और हम अच्छे विचारों के साथ अच्छे फल को भोगते हैं। जीवन में प्रत्येक वस्तु व्यक्ती और परिस्थिती को परीक्षक कि दृष्टी से देखो कि यह हमारी परीक्षा लेने के लिए आये हैं। अब जब इस दृष्टी से देखोगे तो आप अपने आपमें सावधान हो जाओगे और आपके जीवन में समाधान सहज ही हो जायेंगे।













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