वर्षा ऋतु के अवसर पर दिगंबर जैन समाज महरौनी को एक विशेष सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में विराजमान आचार्य श्री निर्भय सागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री गुरुदत्त सागर जी एवं मुनि श्री मेघदत्त सागर जी के सान्निध्य में शांतिनाथ विधान संपन्न हुआ। महरौनी से राजीव सिंघई की पढ़िए, यह खबर…
महरौनी। वर्षा ऋतु के अवसर पर दिगंबर जैन समाज महरौनी को एक विशेष सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में विराजमान आचार्य श्री निर्भय सागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री गुरुदत्त सागर जी एवं मुनि श्री मेघदत्त सागर जी के दिव्य सान्निध्य में शांतिनाथ विधान संपन्न हुआ। इस अवसर पर देश की सुख-शांति और समृद्धि के लिए सामूहिक रूप से मंगलकामनाएं की गईं। धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री गुरुदत्त सागर जी ने कहा कि जिस प्रकार पक्षी और बादल बिना किसी भेदभाव के भगवान के डाकिए बनकर एक स्थान से दूसरे स्थान तक सुगंध और वर्षा द्वारा प्रकृति का संदेश फैलाते हैं, उसी प्रकार सच्चे गुरु भी भगवान के संदेश वाहक बनकर समाज में ज्ञान, सत्य, प्रेम, दया, एकता और भाईचारे की भावना फैलाते हैं। मुनिश्री ने आगे कहा कि गुरु अपने उपदेशों के माध्यम से न केवल लोगों को सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं, बल्कि अपने शिष्यों को नैतिकता और सामाजिक मूल्यों का भी बोध कराते हैं। गुरु का उपदेश एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक ज्ञान और चेतना का संचार करता है और शिष्य को सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठाकर आध्यात्मिक पथ पर अग्रसर करता है। इस अवसर पर मुनि श्री मेघदत्त सागर जी ने भी श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा कि डाकिए का अर्थ होता है दूत या संदेशवाहक।
हमें भी पक्षी और बादल की तरह, बिना भेदभाव के, प्रेम और सद्भाव के साथ समाज में सुगंध और शांति फैलाने वाले बनना चाहिए। मुनिश्री ने मानव जीवन को समृद्ध और सार्थक बनाने के लिए ऐसे कार्यों की प्रेरणा दी। जिनकी सुगंध पूरे विश्व में व्याप्त हो। इस पुण्य अवसर पर क्षेत्रीय जैन समाज के अनेक श्रावक-श्राविकाओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। जिन्होंने भावपूर्वक विधान में भाग लेकर धर्मलाभ अर्जित किया। समाजसेवी पवन मोदी ने बताया कि मुनि श्री गुरु दत्त सागर जी का पावन वर्षायोग 2025 के अंतर्गत मंगल कलश स्थापना का आयोजन 15 जुलाई मंगलवार प्रातः 8 बजे से दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में होगा।













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