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श्री विहसन्त सागर जी महाराज ससंघ का मंगल प्रवेश 12 को: सकल जैन समाज करेगा अगवानी


मेडिटेशन गुरु उपाध्याय विहसन्त सागर महाराज, मुनि विश्वसाम्य सागर महाराज ससंघ का मंगल प्रवेश 12 जुलाई को प्रातः काल 7 बजे अटेर रोड बेटी बचाओ चौराहे से होने जा रहा है। जो पुस्तक बाजार, बताशा बाजार, फ्रीगंज, गोल मार्केट, सदर बाजार होते हुए हाउसिंग कॉलोनी स्थित बद्रीप्रसाद की बगिया पहुंचेंगे। भिंड से पढ़िए, सोनल जैन की यह खबर…


भिंड। मेडिटेशन गुरु उपाध्याय विहसन्त सागर महाराज, मुनि विश्वसाम्य सागर महाराज ससंघ का मंगल प्रवेश 12 जुलाई को प्रातः काल 7 बजे अटेर रोड बेटी बचाओ चौराहे से होने जा रहा है। जो पुस्तक बाजार, बताशा बाजार, फ्रीगंज, गोल मार्केट, सदर बाजार होते हुए हाउसिंग कॉलोनी स्थित बद्रीप्रसाद की बगिया पहुंचेंगे। मुनिराज के स्वागत के लिए विधायक नरेंद्रसिंह कुशवाह सकल जैन समाज के साथ मुनि संघ की अगवानी करेंगे। पार्षद मनोज जैन ने बताया कि मेडिटेशन गुरु उपाध्याय विहसंत सागर जी महाराज नगर में 20 वर्षों के बाद चातुर्मास करने आ रहे हैं। जिसमें आचार्य विराग सागर जी महाराज के सपनों को साकार करने के लिए सम्यक ज्ञान विराग विद्यापीठ स्कूल को आदि आधुनिक बनाएंगे। जिसमें उन्होंने कई योजनाओं को मन में संझाया है उसे इस चातुर्मास में पूर्ण करेंगे।

आकर्षणमय पावन वर्षा योग हुआ नामकरण 

मेडिटेशन गुरु उपाध्याय विहसन्त सागर जी ने इस वर्ष के पावन वर्षा योग का नाम आकर्षणमय पावन वर्षा योग रखा है। जिसमें यह खूबी रही है कि सामान्य रूप से मंच पर कलशों की बोली नहीं लगाई जाएगी। भक्तों द्वारा स्वयंमेव ही कलशों को लिया गया है। जैन ने बताया कि मेडिसिन ग्रुप उपाध्याय विहसन्त सागर ने सन 2005 में क्षुल्लक अवस्था में बतासा बाजार स्थित चैत्यालय जैन मंदिर में चातुर्मास किया था एवं सन 2019 में भगवान महावीर स्वामी की समोशरण स्थली, जहां पर आज तक किसी संत ने चातुर्मास नहीं किया। वहां पर मुनिराज ने चातुर्मास कर बरासो तीर्थ का जीर्णाेद्धार कर महातीर्थ बना दिया। मुनिराज ने 10 वर्षा योग उत्तर प्रदेश एवं 5 वर्षा योग दिल्ली, 6 वर्षा योग मध्यप्रदेश एवं 2 वर्षायोग छत्तीसगढ़, 1 वर्षायोग हरियाणा और 2025 का वर्षा योग भिंड नगर को दिया है

जहां जीर्णोद्धार करवाया, वहां एक चीज का त्याग 

उपाध्याय विहसन्त सागर जी महाराज ने 72 मंदिरों का जीर्णाेद्धार, 50 पंचकल्याणक, 373 वेदी प्रतिष्ठा, 81 शिखर एवं 680 शिखर कलशारोहण, 44 नवीन जैन मंदिर, 8 चौबीसी मान स्तंभ कीर्ति स्तंभ, 50 संत भवन, 55 सिद्ध चक्र महामंडल विधान, 8 हॉस्पिटल, 7 जैन स्कूल, तीन भोजनशाला एवं 25 वर्षों में 83 हजार किमी की यात्रा कर चुके हैं। आहार में 72 चीजों का आजीवन त्याग किया है। जिसमें विशेष रूप से तेल, दही, मीठा आजीवन त्याग है। खास बात यह रही है कि जिस मंदिर का जीर्णाेद्धार कराया। वहां एक चीज का त्याग किया। संकल्प के साथ जीर्णाेद्धार पूर्ण होने पर आजीवन त्याग कर दिया। वचन में सरस्वती का वास रहा है क्योंकि, जो सोचा बोला 99 प्रतिशत पूरा हुआ है। वर्षा योग के दौरान 50 से ज्यादा उपवास एवं चार समय अध्ययन एवं स्वाध्याय करते हैं एवं बरासो वाले बाबा पर अपार श्रद्धा है। ऐसे संत का नगर में आगमन 12 जुलाई को होने जा रहा है एवं 13 जुलाई को कलश स्थापना कार्यक्रम होगा।

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