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प्रभु और गुरु पर श्रद्धान ही जीवन में कल्याणकारी: आचार्य श्री ससंघ ने की चातुर्मास कलश स्थापना


आचार्य श्री निर्भयसागर महाराज ससंघ ने पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन अटामंदिर से भव्य शोभायात्रा के साथ विहार किया। जिसमें आगे-आगे महिला मंडल की श्राविकाएं भक्ति नृत्य करते हुए चल रही थीं। वहीं विशेष वाहन में मंगल कलश लेकर श्रावक शोभायमान थे। शोभायात्रा निर्धारित मार्ग से होते हुए अभिनंदनोदय तीर्थ पहुंची। जहां श्रावकों ने रंगोली सजाकर आचार्य श्री की अगुवाई की एवं श्रावकों ने पाद प्रक्षालन किया। ललितपुर से अक्षय अलय की पढ़िए, यह खबर…


ललितपुर। आचार्य श्री निर्भयसागर महाराज ससंघ ने पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन अटामंदिर से भव्य शोभायात्रा के साथ अभिनंदनोद तीर्थ के लिए विहार किया। जिसमें आगे आगे महिला मंुडल की श्राविकाएं भक्ति नृत्य करते हुए चल रही थीं। वहीं विशेष वाहन में मंगल कलश लेकर श्रावक शोभायमान थे। शोभायात्रा निर्धारित मार्ग से होते हुए अभिनंदनोदय तीर्थ पहुंची। जहां श्रावकों ने रंगोली सजाकर आचार्य श्री की अगुवाई की एवं श्रावकों ने पाद प्रक्षालन किया। यहां आचार्यश्री संघ ने चातुर्मास के लिए कलश स्थापना की। इस अवसर पर आचार्यश्री निर्भयसागर जी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित किया। चातुर्मास को श्रवण संस्कृति का प्रतीक और सामाजिक एकता का सूत्र बताते हुए आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज ने कहा कि यह आत्म जगत का तंत्र हैं।

हर चेहरे की मुस्कान है। चातुर्मास वृद्धों के लिए सहारा और श्रद्धालुओं को अमृतपान है। जैन संत चातुर्मास के माध्यम से समाज में आई विकृतियों को निकालने की प्रेरणा देते हैं। जैसे वर्षा काल में नदी में आई बाढ़ नदी की गंदगी को बहाकर ले जाती है। वैसे ही वर्षायोग में सामू रूपी नदी ज्ञान रूपी बाढ़ से समाज रूपी गंदगी को बहाकर साफ कर देती हैं। उन्होंने कहा गुरू और प्रभु पर श्रावक को श्रद्धा रखनी चाहिए। गुरु के उपकार को कभी भुलाया नहीं जा सकता। संत जहां एक स्थान पर रहकर चातुर्मास स्थापित करते हैं वहीं श्रावक यदि उनके सानिध्य में रहकर उपयोग करे जो जीवन का कल्याण है।

मुनिराजों के गृहस्थ जीवन के परिजनों की अनुमोदना की 

धर्मसभा का शुभारंम वीतराग शासन महिला मंडल की श्राविकाओं ने गुरुभक्ति कर किया। जबकि श्रुति ने भक्ति में नृत्य प्रस्तुत किया। आचार्य श्री के चित्र का अनावरण पंचायत कमेटी के पदाधिकारियों ने किया। दीप प्रज्वलन संजीव जैन लकी परिवार द्वारा किया गया। विद्या पुनीत महिला मंडल ने सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। चातुर्मास कलश स्थापना समारोह के दौरान अतिशय क्षेत्र तपोवन तीर्थ सागर, नवागढ़, महरौनी, मडावरा, वासी समाज के पदाधिकारियों ने आचार्य श्री को श्रीफल अर्पित कर आशीर्वाद ग्रहण किया। आचार्य श्री एवं संघस्थ मुनिराजों के गृहस्थ जीवन के परिजनों को ललितपुर जैन पंचायत ने सम्मानित कर उनके पुण्य की अनुमोदना की।

कार्यक्रम में इन्हें मिला सौभाग्य और यह समाजजन रहे मौजूद 

कलश स्थापनकर्ताओं का चयन प्रतिष्ठाचार्य डॉ. अभिषेक जैन दमोह द्वारा किया गया। जिसमें पुण्यअर्जन राजेन्द्र जैन अंकित जैन थनवारा, राकेश जैन बरया, अजय जैन गंगचारी, अखिलेश जैन गदयाना, बीरेन्द्र जैन मयूर सौरम जैन सीए, जिनेन्द्र जैन पंसारी, देवेन्द्र जैन परिवार, वीरचंद सुरेश जैन न्यूतन ज्वैलर्स, रतन चंद जैन, सोमचंद राजीव जैन लकी, राजेश जैन चंदा परिवार द्वारा किया गया।

ललितपुर नगर में आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज एवं संघस्थ मुनि शिवदत्त सागर महाराज, मुनि सुबदत्तसागर महाराज, मुनि गुरुदत्त सागर महाराज, मुनि भूदत्त सागर महाराज, मेघदत्त सागर महाराज, पदमदत्त सागर महाराज, मुनि वृषमदत्त सागर महाराज, छुल्लक चंद्रदत्त सागर महाराज, छुल्लक श्रीदत्त सागर महाराज ससंघ का चातुर्मास कराने का सौभाग्य मिला। इसके पूर्व मध्यान्ह में इस मौके पर प्रमुख रूप से जैन पंचायत अध्यक्ष डा अक्षय टडया, महामंत्री आकाश जैन, शीलचद अनौरा, कैप्टन राजकुमार जैन, सनत खजुरिया, प्रबंधक मोदी पंकज जैन, मनोज जैन बबीना, प्रतीक इमलिया, राकेश जैन, मीडिया प्रभारी अक्षय अलया, नरेन्द्र जैन छोटे पहलवान, संजय रसिया, वीणा जैन, अनीता मोदी, आदि मौजूद रहे।

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