आचार्य विश्वरत्न सुरीश्वर महाराज ने सोमवार को अपने 80 साधु-साध्वी के साथ नगर में प्रवेश किया। आचार्यश्री केसाथ 150 जिनालयों के पदाधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में श्वेतांबर जैन श्रीसंघों के कई लोग मौजूद रहे। आचार्यश्री का चातुर्मास 18 साल बाद नृसिंह वाटिका में होने जा रहा है। इंदौर से पढ़िए, यह खबर…स्रोत दैनिक भास्कर।
इंदौर। आचार्य विश्वरत्न सुरीश्वर महाराज ने सोमवार को अपने 80 साधु-साध्वी के साथ नगर में प्रवेश किया। आचार्यश्री केसाथ 150 जिनालयों के पदाधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में श्वेतांबर जैन श्रीसंघों के कई लोग मौजूद रहे। आचार्यश्री का चातुर्मास 18 साल बाद नृसिंह वाटिका में होने जा रहा है। श्री अबुर्द गिरिराज जैन श्वेतांबर तपागच्छ उपाश्रय ट्रस्ट एवं चातुर्मास समिति के संयोजन पुण्यपाल सुराणा और कैलाश नाहर ने बताया कि 60 फीट रोड स्थित रतनबाग से गाजे-बाजे केसाथ आचार्यश्री का नगर प्रवेश जुलसू निकाला गया। जुलूस में आचार्यश्री के साथ आचार्य पीयूषभ्रद सुरीश्वर, आचार्य देवनयचंद्र सागर सुरीश्वर, आचार्य मृदुरत्नसागर भी मौजूद थे। साध्वी में हेमेंद्र श्रीजी, दमिता श्रीजी, पूर्णयशा श्रीजी, अमितगुणा श्रीजी, चारुधर्मा श्रीजी, निर्मलगुणा श्रीजी, शीलपूर्णा श्रीजी, हेमप्रज्ञा श्रीजी, सुधासना श्रीजी, चारित्ररसा श्रीजी, शुचिप्रज्ञा श्रीजी, सिद्धांतज्योति श्रीजी, शुद्धिप्रसन्ना श्रीजी आदि शामिल थे।
इधर, कालानीनगर जिनालय व उपाश्रय में आचार्य विश्वरत्नसागर सुरीश्वर महाराज ने चातुर्मास प्रवेश की महत्ता बताते हुए कहा कि वर्षाकाल जीवों की उत्पत्ति का काल है। धर्म आराधना से आत्मा का कल्याण होता है, जिससे श्रावक-श्राविकाओं को पुण्य फल प्राप्त होता है।













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